
धर्मशाला। …पूर्णिमा की रात को जब चांद अपने पूरे शबाब पर था तो भागसूनाग के वाटर फाल में जंगल के समीप बने एक कैफे में मदहोश कदम डीजे की धुन पर थिरक रहे थे। आधी रात ठीक साढे़ बारह बजे पुलिस की टुकड़ी कैफे में प्रवेश करती है और पूरे कैफे को चारों ओर से घेर लेती है। महानगरों की तर्ज पर हाई बीट इलेक्ट्रानिक साउंड की धुन पर कथित नशे की हालत में बड़े घर के ‘साहबजादे’ इतने मदहोश थे कि उन्हें बाहर की दुनिया से कोई सरोकार नहीं था। अचानक फुलमून पार्टी में पुलिस की रेड ने कैफे में हड़कंप मचा दिया और हर कोई इधर-उधर भागने की कोशिश करने लगा। वहीं, पुलिस ने मुस्तैदी दिखाते हुए मौके पर इन छात्रों का धर दबोचा।
हैरत की बात यह है कि देश के कोने-कोने से शिक्षा ग्रहण करने पहुंचे कांगड़ा स्थित एक राष्ट्रीय प्रशिक्षण संस्थान के ये छात्र कथित तौर पर नशे की हालत में पाए गए। हालांकि पुलिस को इनसे फिलहाल तो कोई नशा बरामद नहीं हुआ, लेकिन पार्टी का दारोमदार संभाले दो स्थानीय युवाओं से महज पांच ग्राम चरस बरामद हुई है। बताया जाता है कि ऐसे संदिग्ध आयोजनों के लिए उक्त कैफे पहले भी विवादित रहा है। उधर, न्यायालय ने चेतावनी के साथ पुलिस को संबंधित छात्रों की करतूत को लेकर उनके परिजनों को भी अवगत करवाने के आदेश दिए हैं। हालांकि इससे पूर्व भी पुलिस ने इसी इलाके के धर्मकोट के अलावा शाहपुर के दुरगेला में करीब दो वर्ष पूर्व ऐसी ही फुलमून पार्टी ट्रैप की थी।
उधर, पुलिस अधीक्षक बलवीर ठाकुर का कहना है कि इस तरह के अवैध आयोजनों को क्षेत्र में पनपने नहीं दिया जाएगा। पुलिस ऐसे आयोजनों पर कार्रवाई करेगी।
शौक बना रहा युवाओं को पंगु : डा. भारद्वाज
वरिष्ठ चिकित्सा अधिकारी डा. संजय भारद्वाज का कहना है कि आम तौर पर नशे का शौक युवाओं को इसके प्रति एडिक्ट कर देता है। बकौल डाक्टर भारद्वाज पेयर ग्रुप यानी हमसाथी लोगों में कोई ड्रग लेने वाला हो तो शौक-शौक में इसे दूसरा युवा भी ट्राई करना चाहता है, जो बाद में घातक साबित होता है। उन्होंने युवाओं को सलाह दी है कि भूल से भी शौकिया तौर पर किसी तरह की ड्रग का सेवन न करें। बाद में इसकी आदत पड़ने के बाद व्यक्ति एक तरह से पंगु हो जाता है। साथ ही उन्होंने अभिभावकों को सलाह दी है कि किशोरवय में अपने बच्चों की हरकतों पर ध्यान दें। कहीं उनके व्यवहार में अचानक कोई बदलाव तो नहीं। साथ ही बच्चों को दी जाने वाली पॉकेेट मनी का हिसाब रखें। बच्चों से बाकायदा उसके खर्च का हिसाब लें।
