
चंबा। जिला चंबा के 1495 आंगनबाड़ी केंद्र राम भरोसे चल रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों का नियमित रूप से निरीक्षण करने के लिए जिला चंबा में न तो सीडीपीओ हैं और न ही सुपरवाइजर तैनात हैं। दरअसल जिला में सीडीपीओ के समस्त सात पद खाली चल रहे हैं। साथ ही सलूणी, मैहला और तीसा ब्लाक में आंगनबाड़ी केंद्रों की व्यवस्था जांचने के लिए कोई सुपरवाइजर नियुक्त नहीं किए गए हैं। इन ब्लाकों में 35 के करीब सुपरवाइजरों के पद भी रिक्त चल रहे हैं, जबकि अन्य ब्लाकों में भी सुपरवाइजरों के कई पद खाली चल रहे हैं। वर्तमान में जिला में 1422 आंगनबाड़ी और 73 मिनी आंगनबाड़ी केंद्र चल रहे हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों में तो आंगनबाड़ी वर्कर और न ही हेल्पर तैनात हैं। आंगनबाड़ी केंद्रों बाल विकास एवं सामाजिक अधिकारिता विभाग की तरफ से हर माह सुचारु रूप से राशन की सप्लाई की जा रही है। इस राशन का सही तरीके से वितरण हो रहा है या नहीं। आंगनबाड़ी वर्कर और हेल्पर अपने कार्यों को सही तरीके से निभा रही हैं। यह जानने के लिए कोई अधिकारी नहीं है। खंड परियोजना अधिकारी के सात पद लंबे अरसे से खाली चले हुए हैं। विभागीय अधिकारी यह बात कई बार सरकार के समक्ष रख चुके हैं। खाली पदों की लिस्ट उच्च अधिकारियों के कार्यालय में धूल फांक रही है। हर वर्ष केंद्र और प्रदेश सरकार करोड़ों रुपये का बजट विभाग को मुहैया करवाती है। विभाग के मौजूदा कर्मचारी को स्टाफ की कमी के चलते विभागीय कार्य निपटाने में दिक्कतें पेश आ रही हैं। कई मौजूदा कर्मचारी वर्क लोड बढ़ने से परेशान हो गए हैं और डीपीओ से इसकी शिकायत भी कर चुके हैं। उधर, डीपीओ भी कई बार उच्च अधिकारियों के ध्यान में खाली पदों की बात ला चुके हैं। सरकार की अनदेखी के चलते जिला में बाल विकास विभाग की हालत काफी पतली होती जा रही है। जिला परियोजना अधिकारी एसके चौधरी ने बताया कि उन्होंने रिक्त पदों की बात शिमला में आयोजित बैठक में रखी थी। इसके अलावा पत्राचार के माध्यम से सरकार को अवगत कराया जा चुका है।
