
शिमला

– सी पालरासु, जिला निर्वाचन अधिकारी
हालांकि, चुनाव आयोग के इस फैसले को केंद्रीय गृह मंत्रालय ने सर्वोच्च न्यायालय में चुनौती भी दे रखी है। वहीं, चुनाव आयोग के इस फैसले से तिब्बतियों में अधिक उत्साह नहीं दिख रहा है।
सेंट्रल तिब्बतियन एडमिनिस्ट्रेशन के योजना आयोग ने 2010 में निर्वासित तिब्बतियों का डेमोग्राफिक सर्वे करवाया था। इसमें भारत में तिब्बतियों की जनसंख्या 94203 दर्शाई गई थी। 26 जनवरी 1950 से 15 जुलाई 1987 तक भारत में करीब 35 हजार तिब्बती जन्मे हैं।
इसकी प्रमाणिकता दिल्ली हाईकोर्ट की ओर से नामगयाल डोलकर के पक्ष में 2010 में सुनाए गए फैसले से होती है। जिला कांगड़ा में करीब 20 हजार तिब्बती रह रहे हैं। इनमें करीब छह हजार भारतीय नागरिकता के अधिकारी हैं।
344 ने बनवाए पहचान पत्र
जिला कांगड़ा में अभी तक महज 375 तिब्बतियों ने पहचान पत्र बनवाने के लिए आवदेन किया है। इनमें से करीब 344 तिब्बतियों के भारतीय पहचान पत्र बन गए हैं।
ऐसे में सवाल यह उठता है कि जब नागरिकता के अधिकारी तिब्बती करीब छह हजार तक हैं तो मतदाता पहचान पत्र बनवाने के लिए करीब पांच फीसदी ने ही आवेदन क्यों किया। हालांकि, कुछ तिब्बती इसका कारण यह बता रहे हैं कि अगर वे भारतीय नागरिकता स्वीकार कर लेंगे तो उनका आजादी का सपना धूमिल हो जाएगा।
