पहला बाल दिवस ही जेल में

हल्द्वानी। बच्चों के लिए तो हर दिन नई उम्मीद के साथ आता है, इसके बावजूद बाल दिवस खास होता है। आज बच्चों को अघोषित रूप से उस हर छूट का अधिकार होता जो अक्सर माता-पिता नहीं देते। घर से लेकर स्कूलों तक बच्चों की खिल-खिलाहट फैली रहती है, लेकिन जेल में ऐसा कुछ नहीं होता। इसलिए यहां बाल दिवस के मायने नहीं रहते। ऐसा ही सुनसान होगा हल्द्वानी उपकारागार में अपने परिजनों के कर्मों की सजा काट रहे चार बच्चों का। इसमें तीन बच्चों का तो यह पहला बाल दिवस है। एक बच्चा संवासिनी गृह में अपनी मां के विभिन्न अपराधों में बंद हैं।
संवासिनी गृह की अधीक्षिका विद्या बेलवाल के अनुसार चार माह पूर्व एक नाबालिग लड़की उनके यहां कोर्ट के आदेश पर आई थी। लड़की ने परिजनों की मर्जी के खिलाफ अपने प्रेमी संग शादी कर ली लेकिन परिजनों ने उसकी शादी को नहीं माना और पुलिस केस कर दिया। लड़की के घरवालों के साथ जाने से मना करने पर कोर्ट ने उसे संवासिनी गृह भेजने के आदेश किए। अधीक्षिका के अनुसार लड़की जब यहां पर आई तो वह पेट से थी और उसने यहीं पर अपने बच्चे को जन्म दिया। लड़की पंतनगर की है।
उप कारागार के अधीक्षक मनोज कुमार आर्या ने बताया कि उनके यहां तीन बच्चे अपनी मां के साथ हैं, इसमेें से एक खटीमा की महिला ने डेढ़ माह पहले एक बच्चे को जन्म दिया। जेल में उसका नामकरण हुआ। महिला किसी की हत्या के मामले में अंडर ट्रायल पर जेल में है। ऊधमसिंह नगर जिले की दो और महिलाएं अपने दो बच्चों के साथ बंद है। एक का बच्चा डेढ़ साल तो दूसरी का दो साल का है, लेकिन इन बच्चों का कोई कसूर नहीं है ये बेचारे को अपनी मां के जुर्म की सजा मां के साथ मुफ्त में काट रहे हैं। बच्चे छोटे हैं, इसलिए उन्हें उनकी मां से दूर नहीं किया जा सकता है।

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