
उत्तरकाशी। आपदा प्रबंधन जनमंच एवं हिमालय चिंतन मंच उत्तरकाशी के समग्र और टिकाऊ विकास का मॉडल तैयार करने में जुटा है। मंच के पदाधिकारियों का कहना है कि सड़कें पर्यावरण और नियमों की अनदेखी करके न बनें। जंगल खूब पनपाए जाएं, किंतु वह निकटवर्ती गांव को लघु उपज देकर मालामाल करने वाले हों। कृषि, बागवानी, पर्यटन आदि का विकास पर्यावरण के अनुकूल हो।
नगर पालिका परिषद के सभागार में जुटे जिले के प्रबुद्धजनों ने बढ़ती प्राकृतिक आपदाआें पर चिंता जताई। इसे कुछ हद तक कुदरत तथा कुछ मानव जनित माना। करीब चार घंटे चली चर्चा में सड़काें के निर्माण में कटिंग, फिलिंग के नियमाें की अनदेखी, मलबे को सुरक्षित डंप करने के बजाय नदियों में लुढ़काकर बहाव को अनियंत्रित करने तथा अनियोजित विस्फोटकों के प्रयोग को गलत बताया गया। जंगलाें के संरक्षण तथा संवर्द्धन में स्थानीय लोगाें की भागीदारी बढ़ाने की मांग की गई। कहा कि अखरोट, चुलू, पापामोल, जामुन, रुद्राक्ष, रीठा, हरड़, बहेड़ा, कटहल आदि पौधों का रोपण स्थानीय समुदाय के लिए लाभकारी हो सकता है।
ऐसी बैठक हर माह करने का निर्णय लिया गया। चर्चा में मुख्य शिक्षा अधिकारी एसपी सेमवाल, प्रोफेसर राखी पंचोला, उद्यान अधिकारी रहे श्रीराज पंचोला, एसबीएमए के गोपाल थपलियाल, अजीम प्रेमजी फाउंडेशन के जगमोहन कठैत, जनमंच के रणवीर सिंह राणा, द्वारिका सेमवाल, नागेंद्र दत्त, तनुजा बिष्ट, शांति परमार, सूरत सिंह रावत, हरि सिंह राणा, चतर सिंह रावत, केसी कुड़ियाल आदि मौजूद रहे।
