
शिमला। आप पटाखे जलाते हैं? हां, तो पटाखे में आग लगाने के बाद आप अपनी सुरक्षा के लिए दूर भागकर आंख-कान बंद कर लेते हैं। लेकिन प्रशासन ने पटाखे फूटने से पहले ही आंख-कान बंद कर लिए हैं। आपकी सुरक्षा दाव पर लगा दी गई है। राजधानी का अति संवेदनशील और भीड़भाड़ वाला लोअर बाजार पटाखों से पटने लगा है। भगवान न करे, लेकिन यहां कोई हादसा हो गया तो भारी तबाही मचेगी। व्यवस्था बनाए रखने का दावा करने वाला जिला प्रशासन फिलहाल लापता है।
लोअर बाजार में पटाखा व्यवसाय से जुड़े व्यापारियों ने दुकान के भीतर ही गोदाम बना लिए हैं। बारूद से बने पटाखों के भंडारण का बाकायदा मानक तय है लेकिन राजधानी में इन मानकों को कहीं भी पूरा नहीं किया जा रहा। गोदामों की जानकारी प्रशासन को है लेकिन पटाखा कारोबारियों की पहुंच या प्रलोभन के आगे सब बौने हैं। शहर के बीच घनी आबादी वाले इस बाजार में लाखों की कीमत का बारूद जमा है। थोड़ी सी चूक से कभी भी बड़ा हादसा हो सकता है पर जिम्मेदार लोग आंखें बंद किए हुए हैं। उनके पास इस बात का भी जवाब नहीं है कि जिन लोगों ने बाजारों में पटाखों के गोदाम बना रखे हैं, उसकी रोकथाम के लिए उन्होंने क्या किया है।
क्या कहता है नियम
पटाखा दुकान और गोदाम बनाने के भारतीय विस्फोटक अधिनियम के तहत पटाखे की एक दुकान से दूसरी दुकान के बीच की दूरी 15 फीट से अधिक होनी चाहिए। दुकान और गोदाम एक मंजिल पर होने चाहिए। दुकान से जुड़ा पटाखे का गोदाम नहीं होना चाहिए। दुकान में 10 बोरी बालू होनी चाहिए जबकि गोदाम में 50 बोरी। दो बड़े ड्रमों में हमेशा पानी भरा होना चाहिए। चार से छह अग्निशमन यंत्र होने चाहिए। दिवाली से 15 दिन पहले पटाखों की दुकानें आबादी से दूर व खुले में लगनी चाहिए ताकि दमकल की गाड़ियां आसानी से उस स्थान तक आ-जा सकें। लेकिन यहां तो लोअर बाजार में ही पटाखे की दुकानें सज गई हैं।
