पंचायत में आरक्षण ने बिगाड़ा कई दिग्गजों का खेल

राजधानी में त्रिस्तरीय पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण ने कई जनप्रतिनिधियों की मंशा पर पानी फेर दिया है। कई दिग्गज प्रतिष्ठा वाली सीटें हाथ से निकल जाने के बाद यहां अपनी धमक बनाए रखने की जुगत में लग गए हैं।

उधर कुछ ने दूसरी सीटों की तलाश शुरू कर दी है। हालांकि आपत्तियों के निस्तारण के बाद अभी फाइनल सूची जारी होनी है।

कई नेताओं ने विगाड़ा खेल
पंचायत चुनाव में सीटों के आरक्षण ने कई जनप्रतिनिधियों का खेल बिगाड़ दिया है। यही वजह है कि अब कुछ जनप्रतिनिधि अपनी पत्नियों को तो कुछ अपने किसी खास को चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं।

ग्राम पंचायत हर्रावाला को ही लें तो यह सीट पहले ओबीसी के लिए आरक्षित थी। इस बार हर्रावाला ग्राम पंचायत और क्षेत्र पंचायत दोनों सीटें महिलाओं के लिए आरक्षित कर दी गई हैं।

नेता कर रहे पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी
पूर्व ग्राम प्रधान मूलचंद शीर्षवाल बताते हैं कि सीट आरक्षित होने से इस बार वे खुद चुनाव नहीं लड़ सकते। महिला सीट होने की वजह से अब वह पत्नी को चुनाव लड़ाने की तैयारी में हैं।

उधर प्रधान संगठन के प्रदेश अध्यक्ष सूरत सिंह नेगी इस बार जिला पंचायत के लिए चुनाव मैदान में उतरने की तैयारी में हैं।

रायपुर के प्रधान महेश यादव अनारक्षित सीट पर लगातार दो बार ग्राम प्रधान रह चुके हैं, लेकिन इस बार यह सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई।

ननूरखेड़ा ग्राम प्रधान की सीट ओबीसी थी, यह सीट इस बार महिला कोटे में चली गई। कुछ यही हाल ऋषिकेश ग्राम पंचायत का है।

यहां प्रेम सिंह बिष्ट अनारक्षित सीट से लगातार तीन बार चुनाव जीतते आए हैं। जबकि इस बार यह सीट एससी के लिए आरक्षित हो गई।

पहले भाजपा और फिर कांग्रेस दोनों सरकारों ने जिला पंचायत की पूर्व अध्यक्ष मधु चौहान के लिए भले खासी मुश्किलें खड़ी की हों लेकिन इस बार मधु भाजपा के बैनर तले चुनाव लड़ने जा रही हैं। हालांकि इस बार वे किस सीट से चुनाव लड़ रही हैं उन्होंने अभी स्थिति साफ नहीं की।

Related posts