
कर्णप्रयाग। बेसिक शिक्षा को बेहतर बनाने के लिए भले ही विभागीय अधिकारी और मंत्री तमाम दावे कर रहे हो, लेकिन वास्तविकता कुछ और बयां कर रही है। स्थिति यह है कि क्षेत्र के सात प्राथमिक विद्यालयों का संचालन ग्राम पंचायतों के भवनों पर हो रहा है, लेकिन बीईओ कार्यालय से भेजे जा रहे प्रस्तावों पर शासन स्तर से कोई कार्रवाई नहीं हो रही है।
नगरीय क्षेत्र हो चाहे ग्रामीण, बेसिक शिक्षा अव्यवस्थाओं में जकड़ी हुई है। अधिकारी हो चाहे मंत्री दावे तमाम हो रहे हैं, लेकिन बच्चों को एक सुरक्षित भवन तक नसीब नहीं हो रहा है। इसकी बानगी कर्णप्रयाग ब्लाक में देखने को मिल रही है। आपदा एवं अन्य कारणों से 37 प्राथमिक विद्यालय भवन जर्जर हो चुके हैं। सात प्राथमिक और एक जूनियर भवन को असुरक्षित घोषित कर दिया गया है। इन विद्यालयों का संचालन ग्राम पंचायतों के भवन में हो रहा है।
पंचायत भवन में चल रहे ये विद्यालय
राजकीय प्राथमिक विद्यालय नौली, कोटी, उमट्टा, धल-कांचुला, शैल, कोली और सुखतोली।
इनकी हालत दयनीय
कर्णप्रयाग-प्रथम, राप्रावि बगोली, कल्याड़ी, बैनोली, सिरण, खगेली, थिरपाक, छातोली, तोली-धानेई, कमेड़ा-दो, थापली, खरसाई, बणसोई, बसक्वाली, रिठोली-नैनीसैंण, डिम्मर, खोलाखाल, सोनी, गैंथी, पाडुली-दो, कुण्डडुंग्रा, नैल, हड़ाकोटी, खंडूड़ा, जूनियर ग्वाड़ सुनाक, इंड़ाबधाणी, डुंगी-जसपुर, भकुंड़ा, देवल, कनखुल तल्ला, कालेश्वर, धनपुर, भकुंडा, चमोला और जूनियर हाईस्कूल कालूसैंण।
अधिकारी बोले–
पिछले तीन साल से विभिन्न मदों में विकासखंड के जर्जर प्राथमिक, जूनियर एवं माध्यमिक विद्यालय भवनों की वृहद मरम्मत एवं पुर्ननिर्माण के लिए शासन को प्रस्ताव भेजे जा रहे हैं, लेकिन अभी तक दस प्राथमिक विद्यालयों के प्रस्ताव स्वीकृत हुए हैं। मजबूरी में सात प्राथमिक विद्यालयों का संचालन ग्राम पंचायतों के भवनों पर करना पड़ रहा है।
