
चैलचौक (मंडी)। शिक्षा की गुणवत्ता पर उठ रहे सवालों पर कैसे रोक लग पाएगी, जब शिक्षक ही न हों। प्रदेश में एक ओर स्कूलों में शिक्षकाें के सैकड़ों पद खाली हैं, वहीं कालेजों में भी स्थिति कुछ खास अच्छी नहीं है। सरकारी कालेजों में प्रवक्ताओं के कई पद रिक्त चल रहे हैं। इस बीच विश्वविद्यालय प्रशासन ने राष्ट्रीय उच्चतर शिक्षा अभियान को लागू कर दिया है, लेकिन शिक्षकों की कमी में यह अभियान कैसे सफल होगा, इस पर सवाल उठने शुरू हो गए हैं।
राजकीय महाविद्यालय बासा में शिक्षक तथा गैर शिक्षक कर्मचारियों के एक दर्जन से अधिक पद रिक्त चल रहे हैं। यहां कई महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ता नहीं हैं। हिंदी, अंग्रेजी, बॉटनी, पब्लिक एडमिनिस्ट्रेशन, कॉमर्स, संस्कृत, शारीरिक शिक्षक, समाजशास्त्र, फीजिक्स जैसे महत्वपूर्ण विषयों के प्रवक्ता न होने से छात्रों का भविष्य खतरे में पड़ गया है। महत्वपूर्ण एवं इच्छित विषय होने पर सैकड़ों छात्रों ने इन विषयों में एडमिशन ले रखी है, लेकिन पढ़ाने वाला कोई नहीं है। कालेज में इंग्लिश का एकमात्र प्रवक्ता है। जबकि, अंग्रेजी के ही दो प्रवक्ताओं की कमी खल रही है। सीनियर असिस्टेंट, स्टोर कीपर एवं लाइब्रेरियन के पद रिक्त चल रहे हैं। लैब का पूरा स्टाफ ही नहीं है।
कालेज में छात्रों की संख्या नौ सौ से अधिक है। शिक्षकों की कमी के चलते छात्रों का भविष्य संकट में पड़ गया है। मगर न तो सरकार, कालेज प्रशासन और न ही विश्वविद्यालय इस समस्या पर गंभीर है। कालेज में प्रवक्ताओं के रिक्त चल रहे पदाें को लेकर अब विद्यार्थी परिषद बिफर गई है। परिषद के चैलचौक नगर इकाई अध्यक्ष ललित कुमार का कहना है कि जल्द ही परिषद कार्यकर्ता समस्या को लेकर मुख्यमंत्री से मिलेंगे। यदि रिक्त पदों को जल्द नहीं भरा गया तो परिषद उग्र आंदोलन का रास्ता अपनाएगी। इधर, कालेज प्राचार्य कमलकांत का कहना है कि सारा मामला सरकार के ध्यान में है। छात्रों की समस्या को देखते हुए पीटीए पर प्रवक्ता रखे गए हैं। उधर, नाचन के विधायक विनोद कुमार ने भी छात्रहित से जुड़े इस मसले को सरकार के समक्ष उठाने की बात कही है।
