नौ राज्यों को रोशन करने वाले खुद अंधेरे में

रामपुर बुशहर। देश के नौ राज्यों को रोशन करने वाले 480 परिवार और 3500 प्रभावित अपना जीवन अंधेरे में जीने को मजबूर हैं। आलम यह है कि जिनके घर गए, उन्हें जमीन नहीं मिली। कुछ एक को मिली भी है तो उन्हें भी आज तक मालिकाना हक नहीं मिल पा रहा है। कांग्रेस हो या फिर भाजपा 22 साल में आश्वासन के अलावा कुछ नहीं कर पाई। वहीं, वामपंथी भी विस्थापितों को उनका हक दिलाने में असफल रहे हैं। अब एक बार फिर से सभी विस्थापित और प्रभावित अपने स्तर पर हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। इन्हें परियोजना गेट के सामने अनशन पर बैठे तीन माह होने को हैं, लेकिन फिर भी पूछने कोई नहीं आया।
1991 में 1500 मेगावाट बिजली परियोजना नाथपा झाकड़ी के निर्माण के दौरान कोटला से 480 परिवार विस्थिापित हुए थे। इस परियोजना से 3500 लोग प्रभावित हुए। एमओयू में कई समझौते किए गए। विस्थापितों और प्रभावितों को जमीन और रोजगार देने की भी बात कही गई, लेकिन 22 साल में केवल 61 को ही रोजगार मिल सका। वहीं, नाम मात्र के विस्थापितों को जमीन दी गई। उसका मालिकाना हक आज तक नहीं मिल पाया है। 58 साल की भद्री देवी और 60 साल की सुरमी देवी कहती हैं कि परियोजना के लिए घर जमीन सब कुछ दे दिया, लेकिन बदले में आज तक कुछ नहीं मिला। मजबूरी में अनशन पर बैठना पड़ा। तीन माह होने को हैं लेकिन अभी तक कोई पूछने नहीं आया। अन्य विस्थापितों में भगवान दास, रिशी मेहता, राम मेहता, मंगल दास सहित अन्य लोगों का कहना है कि वे 22 साल से अपने हकों की लड़ाई लड़ रहे हैं। चाहे भाजपा हो या फिर कांग्रेस सबसे आश्वासन के अलावा कुछ नहीं मिला। वहीं विस्थापित कल्याण समिति के अध्यक्ष विशाल मेहता का कहना है कि 22 साल से परियोजना ने उनका हक नहीं दिया गया। अब मजबूरी में अनशन पर बैठना पड़ रहा है, लेकिन अनशन को भी तीन माह होने को है। अभी तक उनकी बात सुनने कोई नहीं आया।

क्या कहते हैं प्रत्याशी
सत्ता में आए तो हक दिलाएंगे
मंडी संसदीय सीट से भाजपा प्रत्याशी राम स्वरूप शर्मा का कहना है कि उन्हें क्षेत्र के दौरे के दौरान पता चला है कि विस्थापितों और प्रभावितों को अब तक उनका हक नहीं मिल पाया है। अगर पे चुन कर लोक सभा पहुंचे तो प्रभावितों को प्राथमिकता के आधार पर उनका हक दिलाया जाएगा।
आचार संहिता हटते ही कड़े कदम उठाएंगे
कांग्रेस प्रत्याशी प्रतिभा सिंह का कहना है कि यह मामला मुख्यमंत्री के ध्यान में है। आचार संहिता हटने विस्थापितों और प्रभावितों को उनका हक दिलाने के लिए कड़े कदम उठाए जाएंगे।

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