
शिमला। व्यापार मंडल शिमला ने अपने सभी सदस्यों से नॉन पीएफए लाइसेंस न बनवाने का आह्वान किया है। नगर निगम पर अवैध वसूली का आरोप लगाते हुए व्यापार मंडल ने इस मुद्दे को लेकर सभी कारोबारियों को एकजुट होने को भी कहा है। शुक्रवार को व्यापार मंडल के महासचिव और नगर निगम में मनोनीत पार्षद इंद्रजीत सिंह ने निगम आयुक्त को पत्र लिख कर इस मुद्दे पर अपनी नाराजगी भी जताई है। लाइसेंस बनाए जाने के विरोध में मुखर हुए व्यापार मंडल शिमला का कहना है नगर निगम अपनी मनमर्जी चलाते हुए अवैध वसूली कर रहा है। अपनी सुविधा के अनुसार बायलॉज बनाकर कारोबारियों पर थोपे जा रहे हैं। इन बायलॉज को बनाने के लिए किसी भी कारोबारी से सुझाव और आपत्ति नहीं मांगी है। बाजार में पर्चे बांट कर कारोबारियों को एक साथ पांच साल के नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने के निर्देश दे दिए हैं। जुर्माने की निर्धारित की गई राशि भी भारी भरकम है। व्यापार मंडल के सदस्यों की संख्या 5 हजार के करीब है।
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कारोबारियों में भारी रोष : रमेश
व्यापार मंडल शिमला के अध्यक्ष रमेश सूद का कहना है निगम के इस फरमान से कारोबारियों में नया नियम बनाने से पूर्व कारोबारियों से सुझाव और आपत्तियां मांगनी चाहिए थी। इस मुद्दे पर सभी कारोबारी एकजुट होकर निगम के खिलाफ मोर्चा खोलने को तैयार है।
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एमसी नहीं बना सकता लाइसेंस : इंद्रजीत
व्यापार मंडल के महासचिव इंद्रजीत सिंह के अनुसार इस मामले के हल होने तक सभी कारोबारियों को लाइसेंस नहीं बनाने को कहा गया है। 1995 में इस मामले में कोर्ट में हुई सुनवाई कारोबारियों के पक्ष में है। नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने का नगर निगम को कोई अधिकारी नहीं है।
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क्या है नान पीएफए लाइसेंस
खाद्य वस्तुओं के अलावा अन्य किसी भी प्रकार का कारोबार करने वालों के नान पीएफए लाइसेंस बनाए जाते हैं। 125 वर्ग फीट तक के क्षेत्रफल की दुकानों को दो सौ रुपये वार्षिक, 126 वर्ग फीट से अधिक तीन सौ रुपये और होटल, गेस्ट हाउस, गैस कंपनी, कोल कंपनी, डिपार्टमेंटल स्टोर, सिनेमा, प्राइवेट स्कूल, मोटर वर्क शाप, पेट्रोल पंप, टेंट हाउस, ट्रेवल एजेंसी, क्लीनिक वर्कर्स और लेबोरेटरी के लिए 500 रुपये वार्षिक शुल्क तय किया गया है।
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कारोबारियों के सवाल
नॉन पीएफए लाइसेंस बनाने के लिए क्या एमसी एक्ट 1994 में संशोधन किया गया है?
पूर्व प्रधान और महासचिव से हुई बातचीत के बाद क्या नई अधिसूचना जारी हुई है?
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जानकारी जुटा हल करेंगे मामला : आयुक्त
नगर निगम आयुक्त अमरजीत सिंह का कहना है व्यापार मंडल की ओर से भेजे गए पत्र से यह मामला उनके ध्यान में आया है। सहायक आयुक्त को मामले की जांच को कहा गया है।
