नैनीताल के मनु ने सचिन से सीखे थे क्रिकेट के गुर

नैनीताल। मास्टर ब्लास्टर सचिन तेंदुलकर का 200वां टेस्ट मैच आखिरी होगा, लेकिन अपने समर्थकों और शिष्यों के लिए क्रिकेट का ‘महानायक’ हमेशा किसी न किसी रूप में क्रिकेट मैदान में रहेगा। उनके शिष्यों में नैनीताल निवासी सैय्यद रियान उर्फ मनु भी एक हैं। मनु ने सचिन के साथ प्रैक्टिस कर उनके अनुभवों से प्रेरणा ली है। इन्हीं अनुभवों को आत्मसात कर मनु बैट उठाते हैं।
मास्टर ब्लास्टर का यह शिष्य चाहता है कि उसके गुरु को भारत रत्न की उपाधि मिलनी चाहिए। मनु की सचिन से पहली मुलाकात दिसंबर-2010 में कोलकाता में श्रीलंका-भारत के बीच खेले गए मैच के दौरान हुई। सचिन ने मनु से कोलकाता में ओस (पाला) पड़ने का समय पूछा तो मनु ने सचिन से भी कुछ प्रश्न किए। जिसमें कवर ड्राइव तथा खेलते समय प्रेशर को झेलने का तरीका पूछा। सचिन ने मनु को बड़े प्रेम से समझाया। सीख दी कि क्रिकेट में खेलते समय सबसे पहले खिलाड़ी को अपने गुस्से पर काबू करना चाहिए। ऐसा हुआ तो प्रेशर अपने आप काबू में होगा।
मनु ने बताया कि सचिन से अनुभव प्राप्त होने के बाद मुझे अगले दिन कोलकाता लीग मैच खेलना था और सचिन की बातों को ध्यान में रख जब मैदान में उतरा तो शतक लगाकर वापस लौटा। इस शिष्य ने 2009 में स्पोर्ट्स कालेज दिल्ली में प्रवेश लिया था। प्रैक्टिस के दौरान मनु को सचिन के अलावा भारतीय टीमों के खिलाड़ी राहुल द्रविड़, विरेंद्र सहवाग, विराट कोहली, गौतम गंभीर, आरपी सिंह, पीयूष चावला, प्रवीण कुमार और भुवनेश कुमार के साथ प्रैक्टिस का मौका मिला।
दिल्ली में प्रैक्टिस के दौरान 2011 में मनु का कंधा टूट गया। जिससे बाकी मैचों में यह खिलाड़ी भाग नहीं ले पाया और वापस घर लौट आया। मनु को भारतीय टीम में न खेलने का आज भी मलाल है। वह पूर्व झारखंड लीग, कोलकाता लीग, लखनऊ लीग और दिल्ली लीग आदि मैच खेल चुके हैं। मनु की माता नगमा परवेज नैनीताल में मदर्स हार्ट स्कूल संचालित करती हैं। उनके पिता सैय्यद परवेज भी अपना रोजगार चलाते हैं। सचिन के सन्यास लेने से यह शिष्य उदास है। कहता है कि सचिन मेेरे लिए हमेशा मैदान में रहेंगे।

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