
नूरपुर (कांगड़ा)। स्वास्थ्य विभाग ने नूरपुर सिविल अस्पताल में तैनात एसएमओ से तमाम वित्तीय एवं प्रशासनिक शक्तियां छीन ली हैं। फिलहाल एसएमओ को उनके पद से हटाने के सही कारणों का अभी तक कोई खुलासा नहीं हो पाया है लेकिन सूत्रों की मानें तो नूरपुर अस्पताल में व्याप्त अव्यवस्था और सीनियर डाक्टरों की आपसी खींचतान के चलते स्वास्थ्य विभाग ने उच्च स्तर पर एसएमओ को प्रभारी पद से हटाने का फरमान जारी किया है।
हैरानी की बात है कि विभागीय स्तर पर एसएमओ से डीडीओ पॉवर स्नैच करने का फैसला काफी गोपनीय तरीके से लिया गया है। इस बाबत सीएमओ आफिस को भी कोई जानकारी नहीं है जबकि स्वास्थ्य विभाग के सचिव के मार्फत जारी एक अधिसूचना के मुताबिक एसएमओ को प्रभारी के पद से हटाकर बीएमओ (गंगथ) को नूरपुर अस्पताल का अतिरिक्त कार्यभार सौंपा गया है। यानी अब न सिर्फ डीडीओ पॉवर बीएमओ के पास होगी बल्कि नूरपुर अस्पताल के संचालन का जिम्मा भी बीएमओ के कंधों पर होगा।
नूरपुर स्थित गंगथ बीएमओ कार्यालय के अंतर्गत 2 सामुदायिक स्वास्थ्य केंद्र, 13 प्राथमिक स्वास्थ्य केंद्र, 18 चिकित्सक, 120 स्वास्थ्य कार्यकर्ता व 6 पर्यवेक्षक कार्यरत हैं। ऐसे में नूरपुर अस्पताल में तैनात अन्य वरिष्ठ डाक्टरों को नजरअंदाज कर एसएमओ का कार्यभार बीएमओ गंगथ को सौंपना फिलहाल किसी के गले से नीचे नहीं उतर रहा है। सूत्रों की मानें तो एसएमओ को प्रभारी पद से हटाने का एक कारण राजनीतिक दबाव भी बताया जा रहा है।
बीएमओ गंगथ डा. नीरजा गुप्ता ने सोमवार शाम को नूरपुर अस्पताल में अपना कार्यभार संभालने के बाद अस्पताल स्टाफ के साथ बैठक की तथा अस्पताल में अनुशासन, सफाई व्यवस्था व मरीजों को बेहतर सुविधाएं मुहैया करवाने आदि मुद्दों को लेकर चर्चा की। डा. नीरजा गुप्ता ने स्पष्ट किया कि यह उच्च स्तर पर लिया गया फैसला है जिसके चलते उन्होंने अपना कार्यभार संभाला है।
