
बरमाणा (बिलासपुर)। एनटीपीसी की कोलबांध परियोजना के तहत सतलुज का पानी एक बार फिर से डाइवर्जन टनलाें से निकलने लगा है। इन्हें गत वीरवार को ही बंद करके बांध में जल भराव का कार्य शुरू किया गया था। शुक्रवार को इनसे दोबारा पानी निकलता नजर आया। लोग इसे परियोजना में खामी की नजर से देख रहे हैं। परियोजना प्रबंधन इसे तकनीक का एक हिस्सा बता रहा है।
एनटीपीसी ने सतलुज पर कोलबांध परियोजना के माध्यम से जलविद्युत क्षेत्र में कदम रखा है। 800 मेगावाट क्षमता के इस प्रोजेक्ट के तहत बांध के निर्माण को कॉफर डैम बनाकर सतलुज का पानी डाइवर्जन टनलों के माध्यम से दूसरी ओर डाइवर्ट किया गया था। मुख्य बांध का निर्माण कार्य पूरा होने के बाद गत वीरवार को ही डाइवर्जन टनलाें को बंद करके बांध में जलभराव कार्य शुरू किया गया था। शुक्रवार सुबह सतलुज का पानी एक बार फिर से इन्हीं टनलाें से निकलता हुआ नजर आया। बांध में अभी नाममात्र पानी जमा हुआ है। स्थानीय लोग आशंका जता रहे हैं कि डैम में पानी का दबाव बढ़ने से डाइवर्जन टनलों के गेट टूट गए, जिसकी वजह से मुख्य बांध में एकत्रित होने के बजाए गत वीरवार रात से पानी दोबारा इन टनलों से निकलने लगा है। यदि एक-डेढ़ माह बाद ऐसा होता तो तब तक बांध में बड़े पैमाने पर जमा हुआ पानी तबाही मचा सकता था। उधर, एनटीपीसी के जनसंपर्क अधिकारी प्रवीण रंजन ने बताया कि डैम का डिजाइन ही ऐसा है। सीमा से अधिक पानी भरने पर डाइवर्जन टनलों के गेट स्वत: ही खुल जाते हैं, ताकि निर्धारित मानकों के अनुसार ही बांध में जल भराव हो सके। निर्माण में किसी खामी का सवाल ही पैदा नहीं होता।
