
देहरादून। क्लीनिक इस्टेब्लिशमेंट एक्ट 2010 को जनविरोधी, डाक्टर विरोधी और खामियों का पिटारा बताते हुए इंडियन मेडिकल एसोसिएशन ने विरोध तेज कर दिया है। एसोसिएशन के प्रदेश अध्यक्ष डा. आरएन सिंह और सचिव डा. बीवी चौधरी ने गुरुवार को आईएमए ब्लड बैंक में पत्रकारों को बताया कि एक्ट के विरोध में 15 जून को निजी क्षेत्र के डाक्टर हड़ताल पर रहेंगे। इस दिन इमरजेंसी सेवाएं भी बंद रहेंगी।
डाक्टरों ने बताया कि अगर क्लीनिकल इस्टेब्लिशमेंट एक्ट लागू हुआ तो चिकित्सीय सेवाएं महंगी हो जाएंगी। प्रदेश में डाक्टरों की वैसे ही कमी है, बिल लागू होेने के बाद दूसरे प्रांतों में डाक्टरों का पलायन बढ़ जाएगा। दिल्ली, यूपी, पंजाब और हरियाणा में एक्ट लागू नहीं है। एक्ट से इंस्पेक्टर राज बढ़ेगा। कारपोरेट अस्पतालों को फायदा पहुंचाने के लिए एक्ट लागू किया जा रहा है। 15 को हड़ताल के बाद 18 जून को स्वास्थ्य मंत्री सुरेंद्र सिंह नेगी से डाक्टर मिलेंगे।
अगर डाक्टरों की मांगें न मानी गईं तो आंदोलन की अगली रणनीति बनाई जाएगी। डा. चौधरी ने कहा कि अगर सरकार को बिल लागू ही करना है तो इसकी खामियों को दूर किया जाए। साथ ही एक्ट की फिर समीक्षा हो। समीक्षा समिति में एसोसिएशन के सदस्यों को भी शामिल किया जाए। उनका कहना था कि एक्ट लागू होने के बाद डाक्टरों का क्लीनिक चलाना मुश्किल हो जाएगा। नेताओं और लाल फीताशाही का दखल अधिक बढ़ जाएगा। डाक्टरों से अगर वसूली की जाएगी तो वे मरीजों से वसूलेंगे। इससे चिकित्सा बेवजह महंगी होगी, जिससे गरीब परेशान होंगे। इस मौके पर डा. भीम पांधी, डा. राकेश कालरा आदि मौजूद रहे।
