निकाय की पटरी पर भी नहीं दौड़ी विकास की गाड़ी

पुरोला(उत्तरकाशी)। पुरोला को नगर पंचायत का दर्जा मिलने के बाद लोगों में विकास की जो उम्मीद जगी थी उसे बीस महीने बाद भी पंख नहीं लग पाए हैं। नगर निकाय चुनाव के बाद नया बोर्ड भी बना लेकिन हालात जस के तस बने हैं।
शासन ने 9 अप्रैल 2012 को पुरोला को नगर पंचायत का दर्जा दिया था। शुरू में एसडीएम को प्रशासक के तौर पर नियुक्त किया गया। नगर निकाय चुनाव के बाद बोर्ड के गठन से लोगों उम्मीद थी कि नगर में विकास की गाड़ी आगे बढे़गी। नगर पंचायत का कार्यालय अब भी किराए के भवन में चल रहा है। संविदा कर्मियों के भरोसे काम चलाया जा रहा है। नगर की जनता को अभी भी पहले जैसे समस्याओं से जूझना पड़ रहा है। जल संस्थान ने भी शहरी दरें लागू कर पानी के बिल में 13 प्रतिशत तक का इजाफा कर दिया है। गृहकर के लिए भी सर्वेक्षण शुरू कर दिया गया है। जनता पर करों का बोझ तो बढ़ रहा लेकिन बदले में सुविधाएं नहीं मिल पा रही हैं।

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