
चंडीगढ़
नाबालिग लड़की की सास की याचिका पर सुनवाई करते हुए पंजाब-हरियाणा हाईकोर्ट ने फैसला सुनाते हुए लड़की को सास के सुपुर्द करने का आदेश दिया है। हाईकोर्ट ने शर्त रखी कि सास को यह हलफनामा देना होगा कि वह अपने बेटे को बहू के बालिग होने तक समीप नहीं आने देगी। इसके लिए उसे एक लाख रुपये का बांड भरना पड़ेगा। शर्त पूरी न होने की स्थिति में यह बांड जब्त कर लिया जाएगा।
कुलविंदर कौर ने हाईकोर्ट में याचिका दाखिल करते हुए एसडीएम भुलत्थ, कपूरथला द्वारा जारी आदेश को चुनौती दी थी। आदेश के तहत बाल विवाह निरोधक अधिनियम में लड़के पर मामला दर्ज कर हिरासत में और लड़की को चिल्ड्रन प्रोटेक्शन होम जालंधर भेज दिया गया था। लड़की की आयु साढ़े 17 वर्ष थी। लड़की की मां की शिकायत पर मामला दर्ज किया गया था, जिसके बाद लड़के को जमानत मिल चुकी है।
याची की तरफ से दलील दी गई कि हाईकोर्ट की एक बेंच ने प्रीति बनाम हरियाणा मामले में नाबालिग लड़की को सास को सौंप दिया था। इसी आधार पर उसकी बहू को भी उसे सौंपा जाए। सुनवाई के दौरान हाईकोर्ट ने वीडियो कॉन्फ्रेंसिंग के जरिए लड़की का बयान लिया। लड़की ने कहा कि वह अपनी सास के साथ जाना चाहती है। लड़की के परिजनों ने कहा कि लड़की नाबालिग है, इसलिए उसे नारी निकेतन भेजा जाए। सभी पक्षों को सुनने के बाद हाईकोर्ट ने याचिका स्वीकार करते हुए लड़की को सास को सौंपने का आदेश दिया।
