नहीं भूल पाएगा मौत का तांडव

धर्मशाला। चार धाम की यात्रा पर घर से निकले कांगड़ा जिला के 26 लोग शनिवार सुबह मौत को मात देकर सकुशल घर लौट आए। मौत को करीब से देख चुके इन लोगों के चेहरे पर खुशी तो थी पर गम भी। वहीं उनके सही सलामत घर पहुंचने पर उनके परिजनों तथा रिश्तेदारों ने राहत की सांस ली है और भगवान का धन्यवाद किया है।
दो धामों की यात्रा करने के बाद केदारनाथ के लिए रवाना हुए इस जत्थे की 14 जून को खराब मौसम के चलते रास्ते में ही ब्रेक लग गई। बारिश तेज होने की वजह से जत्था रास्ते में ही रुक गया। 15 व 16 जून को भी पूरा जत्था वहीं ठहरने को मजबूर रहा। 16 जून को यदि चंद मिनटों में जत्था होटल से बाहर न निकलता तो कुछ भी हो सकता था। बादल फटने के बाद पानी का बहाव चंद मिनटों में बहुमंजिला होटल को बहाकर ले गया। जत्थे में गए लोगों के अनुसार कंड नामक स्थान पर स्थापित सात होटलों का उनके देखते ही देखते नामोनिशान मिट गया। इसी दिन जत्थे में शामिल सभी लोग चार किमी पैदल सफर तय कर एक धाम में पहुंचे, जहां उन्होंने एक दिन बिताया। वहीं 18 को मौसम साफ होने के बाद जत्थे ने वहां से निकलने में ही भलाई समझी। जहां से जत्था 27 किमी पैदल सफर करके सुरक्षित ठिकाने तक पहुंच पाया। वहां वह एक इंटर कालेज के भवन में ठहरे। इसके बाद वह रुद्रप्रयाग की ओर पैदल चल दिए। लेकिन फिर से मौसम खराब हो गया व जत्था टीहरी के पास चंबा में ठहर गया, जहां से वह 21 जून को सुबह हरिद्वार पहुंच गए। एचआरटीसी की बस से शनिवार सुबह कांगड़ा पहुंचे। हालांकि कांगड़ा जिला के सभी लोग सुरक्षित घर पहुंच गए हैं। लेकिन अभी भी यह लोग डरे व सहमे हुए हैं। यह लोग मौत के उस भयानक तांडव को नहीं भूल पाए हैं।

बस का नहीं कोई अता-पता
कांगड़ा के 26 लोग चार धाम की यात्रा के लिए जिस बस में गए थे। बारिश और बाढ़ के तांडव में बस का कोई पता नहीं चल पाया है। हालांकि बस का ड्राइवर भी जत्थे के साथ वापस अपने घर पहुंच गया है। जबकि बस के साथ-साथ उनका सामान भी गायब है।

लोगों में सरकार के प्रति रोष
यात्रा पर गई धर्मशाला वासी शिवकांता, मंजुलता सूद, नरेंद्र सूद, घनश्याम ठाकुर, नीलम, राजेंद्र सूद आदि ने प्रदेश की सरकार के प्रति कड़ा रोष जताया है। उनका कहना है कि प्रदेश सरकार व वहां के प्रशासन की उनकी कोई मदद नहीं की। कोसों का सफर पैदल तय करके वह सुरक्षित स्थान तक पहुंचे।

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