नहीं बने आधार, कैसे होगा बेड़ा पार

बिलासपुर। घरेलू रसोई गैस पर सब्सिडी के लिए आधार नंबर की अनिवार्यता उपभोक्ताआें पर भारी पड़ने जा रही है। प्रदेश के चार जिलों में सब्सिडी की राशि 15 फरवरी से आधार नंबर के माध्यम से सीधे उपभोक्ताआें के बैंक खाताें में जमा होगी, लेकिन बड़ी संख्या में लोगाें को कई माह, यहां तक कि एक वर्ष से अधिक समय के बाद भी आधार कार्ड नहीं मिले हैं। ऐसे में उन्हें अपनी जेब ढीली करके बाजार भाव पर ही सिलेंडर लेने पड़ेंगे।
प्रदेश के चार जिलों बिलासपुर, मंडी, हमीरपुर व ऊना के घरेलू रसोई गैस उपभोक्ताओं को मिलने वाली सब्सिडी की राशि 15 फरवरी से सीधे उनके बैंक खातों में जमा होगी। इसके लिए उपभोक्ताओं के पास आधार नंबर होना अनिवार्य है, लेकिन अभी तक बड़ी संख्या में लोगों के आधार कार्ड ही नहीं बने हैं। आलम यह है कि एक-डेढ़ वर्ष पूर्व पंजीकरण करा चुके कई लोग भी अभी तक इनका इंतजार कर रहे हैं। आधार कार्ड बनाने की प्रक्रिया दोबारा शुरू की गई है, लेकिन पूर्व में पंजीकरण करा चुके लोगों को यह कहकर वापस भेजा जा रहा है कि दूसरी बार पंजीकरण नहीं होगा। उनके आधार कार्ड जल्द ही उन्हें मिल जाएंगे। उन्हें इंटरनेट पर इनरोलमेंट स्टेटस जानने की सलाह भी मिल रही है, लेकिन उसका भी फायदा नहीं हो रहा है। संबंधित वेबसाइट खंगालने पर संदेश मिल रहा है कि उनके द्वारा दर्ज की जा रही इनरोलमेंट आईडी फिलहाल उपलब्ध नहीं है।
आधार कार्ड बनाने में देरी के कई अन्य कारण भी सामने आ रहे हैं। कई लोगों को इसके लिए एक-एक माह बाद का समय मिल रहा है। 15 फरवरी तक अपने रसोई गैस डिस्ट्रिब्यूटर के पास आधार नंबर पंजीकृत न कराने पर वे सब्सिडी से वंचित हो जाएंगे। जाहिर है कि उन्हें घरेलू गैस सिलेंडर के लिए दोगुने से अधिक पैसे देने पड़ेंगे। उपायुक्त डा. अजय शर्मा ने भी माना कि आधार कार्ड की कुछ समस्या है। इसे सुलझाया जा रहा है।

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