
हल्द्वानी। नगरनिगम के पहले निर्वाचित बोर्ड का 100 दिन का कार्यकाल पूरा हो गया है। तीन महीने में मेयर की घोषणाएं और योजनाएं कागजों तक सिमटी हैं। बोर्ड निर्वाचन के बाद शहर में विकास के नाम पर एक ईंट भी नहीं लगी है। हालांकि, सभी योजनाएं पाइप लाइन में हैं। इसके लिए शहर के लोगों को महीनों इंतजार करना पड़ेगा। इनके लागू होने से शहर की सूरत और सीरत दोनों ही बदलेगी।
नगर निगम का दर्जा मिलने के बाद लोगों में शहर के विकास की उम्मीद जगी थी। निगम के पहले निर्वाचित बोर्ड में भाजपा के डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला की मेयर के रूप में ताजपोशी हो गई। प्रदेश में कांग्रेस की सत्ता है। स्थानीय विधायक और सांसद भी कांग्रेसी हैं। इन परिस्थितियों में मेयर डा. रौतेला के लिए शहर के विकास की राह कठिन हो गई है। केंद्र सरकार की योजनाओं को छोड़ दिया जाए जो प्रदेश सरकार से हल्द्वानी नगर निगम क्षेत्र के विकास के लिए अब तक कोई सहयोग नहीं मिला है।
प्रदेश सरकार, सांसद और विधायक के सहयोग के बिना शहर में विकास की बात करना ही बेमानी है। नगर निगम आर्थिक रूप से कमजोर है। आमदनी की तुलना में खर्चे अधिक हैं। दो बोर्ड बैठकों में आमदनी बढ़ाने पर ही ठोस चर्चा हुई है। चर्चा भी बोर्ड बैठकों के बाद फाइलों तक सिमट गई हैं। निर्वाचित निगम बोर्ड के कार्यकाल के 100 दिन पूरे हो चुके हैं। इसका शहर के विकास पर फिलहाल कोई असर नहीं दिखा है।
शहर के विकास का खाका खींचा जा चुका है। इसके लिए बजट की आवश्यकता है। निगम को आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बनाने के लिए निगम की बोर्ड बैठकों में कई प्रस्ताव स्वीकृत हो चुके हैं। इनमें काम चल रहा है। शहर में कूड़ा निस्तारण और सफाई व्यवस्था में सुधार हुआ है। काठगोदाम से लेकर मंडी तक सड़कों के किनारे एलईडी लाइटें लगाई गई हैं। प्रस्तावित योजनाएं साकार होते ही शहर में बदलाव आएगा। – डा. जोगेंद्र सिंह रौतेला, मेयर नगरनिगम
