नशे के दलदल में दम तोड़ने लगे नौजवान

शिमला। नशे के दलदल में फंसे नौजवान काल का ग्रास बन रहे हैं। हर साल औसतन शिमला में नशे के कारण बारह से पंद्रह युवाओं की मौतें हो रही हैं। स्कूल, कॉलेज के छात्र नशे के जाल में फंसते जा रहे हैं। नशे के सौदागरों पर शिकंजा कस पाना पुलिस के बूते से बाहर हो रहा है। मंगलवार को टुटू के जंगल में भी एक नौजवान का शव मिला। उससे भी नशे का सामान बरामद हुआ है। इसी तरह संजौली में होटल मैनेजमेंट की पढ़ाई करने वाले 22 साल के छात्र की मौत भी नशे की ओवरडोज से हुई। यह वह मामले हैं, जिनका खुलासा हुआ है। अधिकांश मामलों में जवान बेटे की मौत के कारणों पर अभिभावक पर्दा डालना ही बेहतर समझते हैं।

क्या कहते हैं मनोचिकित्सक
आईजीएमसी में तैनात डा. दिनेश शर्मा मनोचिकित्सक का कहना है कि नशे की चपेट में सबसे अधिक युवा वर्ग है। स्कूलों, कॉलेजों के सबसे अधिक मामले उनके सामने आते हैं। कई मामले ऐसे भी हैं, जो नशे में पड़कर पढ़ाई छोड़ चुके हैं। बच्चों की गतिविधियों पर अभिभावक जरूर नजर रखें।

अभिभावक ध्यान दें
बच्चे का अकेले रहने की जिद करना
जरूरत से अधिक चिड़चिड़ापन
आंखों में पीलापन और छोटापन
देर से घर आना और कम बातचीत
भूख न लगना, सभी के साथ खाना न खाना
अधिकांश समय अकेले कमरे में बिताना
घर में महंगी चीजें और पैसे यकायक गुम होना

ऐसा करें अभिभावक
अपने बच्चों के कमरों की तलाशी लें
कपड़े, मोजे और स्कूल, कॉलेज बैग खंगालते रहें
पॉकेट मनी में कटौती करें और नजर रखें
स्कूल, कालेज की उपस्थिति जरूर देखें
दो- तीन दिन के लिए साथ में आउटिंग को ले जाएं
बाहर कहां जाता है, किससे मिलता है, सब देखें

अगर नशाखोरी है तो प्यार से छूटेगी
नशे में गिरफ्त बच्चे को प्यार दें
झाड़ फूंक नहीं, डाक्टरी इलाज करवाएं
मनोचिकित्सक से सलाह लें
एक दो सिटिंग बेहद जरूरी है
नशा छुड़ाने वाले केंद्रों में संपर्क करें
अकेला न छोड़ें, उसे समझने की कोशिश करें

प्रतिबंधित दवाओं का बाजार
शहर में प्रतिबंधित दवाओं की खरीद फरोख्त पर शिकंजा नहीं कसा जा सका है। हालांकि पुलिस और स्वास्थ्य विभाग कोशिश करते हैं, लेकिन कोशिश पर्याप्त नहीं है। हरियाणा, पंजाब से नशीली दवाओं की तस्करी शिमला में होती है। पुलिस अधीक्षक अभिषेक दुल्लर ने कहा कि ऐसे लोगों पर नजर रखी जा रही है। पुलिस विशेष अभियान भी चला रही है। अभिभावक भी पुलिस की मदद करें।

दवाओं का असर
याददाश्त का लगभग शून्य हो जाना
किसी भी चीज से भय खत्म होना
8- 9 कैप्सूल का असर तीन दिन तक रहना
भूख प्यास न लगना, आंखें सिकुड़ जाना
ओवर डोज के कारण हार्ट अटैक से मौत होना
नशा उतरने के बाद कुछ याद न रहना

Related posts