
रामपुर बुशहर। यहां की नरैण और बाहली पंचायत में ओलावृष्टि से सेब की फसल को भारी नुकसान पहुंचा है। बुधवार मध्यरात्रि इन पंचायतों में पंद्रह से बीस मिनट तक जमकर ओले बरसे। साल भर की मेहनत से तैयार फसल पर प्रकृति का कहर बरसने से बागवान हताश हैं। बागवानों ने सरकार से नुकसान का आकलन करवाकर आर्थिक सहायता की गुहार लगाई है।
ओलावृष्टि से नरैण पंचायत के दलोग, मंढोग और बाहली के नैहरा, भमराली आदि गांवों में सेब की फसल को काफी नुकसान पहुंचा है। बागवानों का दावा है कि पंद्रह से बीस मिनट तक हुई जमकर ओलावृष्टि से लगभग पचास फीसदी फसल तबाह हो गई है। बागवान राजीव देष्टा, बहादुर सिंह, जगदीश शर्मा, राहुल सूद, डा. केदार सिंह, अनिल मेहता, केडी मेहता, बेनी लाल शर्मा, लायक राम गुप्ता, मोहन लाल शर्मा और नीटू कायथ ने बताया कि ओलावृष्टि इतनी जबरदस्त थी कि फलों के साथ पत्ते भी जमीन पर आ गिरे। उन्होंने कहा कि सेब इस क्षेत्र के लोगों की आजीविका का मुख्य साधन है। आधी फसल बर्बाद होने से बागवानों का लाखों का नुकसान हुआ है। उन्होंने सरकार से मांग की है कि नुकसान का आकलन जल्द करवाकर आर्थिक सहायता उपलब्ध करवाई जाए। उधर, उद्यान विभाग के अधिकारी डा. मनमोहन चौहान ने इन पंचायतों में ओलावृष्टि से सेब की फसल प्रभावित होने की पुष्टि की है। उन्होंने बताया कि नुकसान के आकलन के लिए टीम भेजी जाएगी। आकलन के बाद ही पता चलेगा कि कितने प्रतिशत नुकसान हुआ है।
पौधों की ग्रोथ के लिए स्प्रे करें
ओलावृष्टि से प्रभावित बागवान चार से पांच दिन के बाद अपने बगीचों में एक किलो यूरिया, कार्बनडिजम (बैवस्टीन) सौ ग्राम और इंडोफिल 600 ग्राम को दो सौ लीटर पानी में घोलें और फिर छिड़काव करें। इस स्प्रे के दस दिन बाद पोषक तत्वों जैसे एग्रोमिन, मल्टीप्लेक्स, माईक्रोविट 400 से 600 ग्राम को दो सौ लीटर पानी में घोलकर छिड़काव करें। इससे ओलावृष्टि से जख्मी पौधों को ग्रोथ मिलेगी।
