
कर्णप्रयाग। गत 16 से 20 जून तक उफनाई अलकनंदा और पिंडर से लोगों में ऐसा भय बना कि लोग सालों से बसे भवनों को छोड़ने पर मजबूर हो गए हैं। सिमली रोड पर चार दशक से रह रहे आरके अग्रवाल ने परिवार सहारनपुर शिफ्ट कर दिया है तो लंबे समय से रह रहे आशू ने भी अन्यत्र शिफ्ट होने में भलाई समझी। एक दशक से दुकान की तलहटी में आवास बनाने वाले राकेश कोटियाल ने भी सुरक्षा की दृष्टि से मुख्य बाजार छोड़ दिया। नगर के बाजारों की हालत यह है कि इन दिनों हेमकुंड की यात्रा पर आने वाले श्रद्धालुओं से बाजार में चहल पहल रहती थी, लेकिन अब यह सब गायब है। पिंडर घाटी की सड़क क्षतिग्रस्त होने से तो यहां लोकल राहगीरों का आवागमन भी ठप है। स्थानीय दुकानदार अनिल अग्रवाल, सुभाष सती और एमएस तोपाल आदि कहते हैं कि यात्रा पड़ाव होने के चलते यहां बाजारों में सन्नाटा है। लोकल आवागमन बंद होने से मकान का किराया चुकाने सहित रोजी रोटी का संकट बन गया है।
