नदियों से पांच सौ मीटर दूर बने सड़कें

रुद्रप्रयाग। पिछली जून में आया जलप्रलय यह सबक सिखाकर गया है कि सड़कों का निर्माण नदियों से करीब पांच सौ मीटर दूर होना चाहिए। तभी वे नदियों से सुरक्षित रह सकती है। राज्य में जहां भी सड़क नदियों के समानांतर थी, वहां उनका नामोनिशान मिटा। भू-वैज्ञानिक नदी के बजाय ऊपरी स्थानों से सड़क निर्माण का सुझाव दे रहे हैं।
बाढ़ से जिले अधिकांश सड़कें बह गई हैं। अभी भी कई सड़कों पर खतरा मंडरा रहा है। स्थिति यह है कि पानी थोड़ा कम होते ही सड़क के नीचे कटाव हो रहा है। मलबे के कारण नदियों का लेवल उठने से खतरा बढ़ गया है। यही हाल गौरीकुंड-केदारनाथ पैदल मार्ग का है। यहां 14 किमी मार्ग मंदाकिनी नदी के निकट था, जो पानी बढ़ते ही बह गया है।

सड़क हार्ड रॉक में बननी चाहिए। भले इसमें अधिक खर्चा आएगा, लेकिन यह टिकाऊ होगी। नदी के किनारे पानी के लिए स्थान छोड़ देना चाहिए। -प्रो. डीएस कोटलिया, भू-विज्ञानी, कुमाऊं विवि

पुराने जमाने में चट्टियों के रास्ते हुआ करते थे। लोनिवि ने इसी के साथ सड़क बना दी। 60 के दशक में सड़क जब बीआरओ के हैंडओवर हुई, तो इसी मार्ग को चौड़ा कर दिया गया। अब कई स्थानों पर सड़कों के समरेखण में परिवर्तन करना होगा। -केके राजदान, चीफ इंजीनियर बीआरओ

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