
हिमाचल को बिजली और दिल्ली को पानी मुहैया करवाने वाला 5000 करोड़ का पावर प्रोजेक्ट भी केंद्र में यूपीए-2 की सरकार में पर्यावरण मामले में हुई सियासत का शिकार हुआ। हिमाचल के सिरमौर जिले के रेणुका में बनने वाले प्रोजेक्ट को 2010-11 के दौरान से फॉरेस्ट क्लीयरेंस नहीं दी गई। पर्यावरण के नाम पर आपत्ति लगाकर प्रस्ताव को वापस लौटा दिया गया था।
पूर्व केंद्रीय मंत्री जयंती नटराजन और राहुल विवाद के सामने आने के बाद इसकी पुष्टि हो रही है। इससे दिल्ली की जनता को तो नुकसान हुआ ही, साथ ही प्रोजेक्ट की लागत 1500 करोड़ से अधिक बढ़ गई है। हिमाचल भी घाटा उठाएगा। सिरमौर के रेणुका में दिल्ली को पानी पिलाने के लिए यूपीए-1 के कार्यकाल में प्रोजेक्ट बनाने की कवायद शुरू की गई।
