
शिमला। राजधानी में एक हजार मकान मालिकों से पिछले 20 वर्षों से गृह कर न वसूले जाने पर हाईकोर्ट ने नगर निगम को फटकार लगाई है। हाईकोर्ट ने कहा कि नगर निगम प्रशासन की कार्यप्रणाली नकारात्मक है। मुख्य न्यायाधीश एएम खानविलकर और न्यायाधीश आरबी मिश्रा की खंडपीठ ने नगर निगम को आदेश दिए हैं कि वह डिफाल्टरों के खिलाफ कानून सम्मत कार्रवाई करे।
हाउस टैक्स के मामले पर सुनवाई करते हुए हाईकोर्ट ने अपने आदेश में कहा कि नगर निगम का रिकवरी विभाग अपने काम के प्रति लापरवाही से काम कर रहा है। ऐसे लापरवाह कर्मचारियों के खिलाफ कार्रवाई की जानी चाहिए। 20 वर्षों से हाउस टैक्स क्यों वसूला नहीं जा रहा है, इसकी जवाबदेही भी तय होनी चाहिए। मामले की आगामी सुनवाई 7 अगस्त को निर्धारित की गई है। सुनवाई के दौरान नगर निगम द्वारा अदालत को बताया गया कि 380 मकान मालिकों से 4 करोड़ 17 लाख रुपये की राशि गृह कर के रूप में वसूली जानी है। इसमें से 150 मकान मालिकों के खिलाफ संपत्ति जब्त करने की कार्रवाई शुरू कर दी गई है।
नगर निगम को अपने कर्मियों के लापरवाहपूर्ण रवैये के कारण करोड़ों रुपये का नुकसान उठाना पड़ रहा है। नगर निगम शिमला की ओर से यूनिट एरिया मेथड से टैक्स जमा करने संबंधी बायलाज न बनाने पर अदालत ने गृह कर को पुरानी कर प्रणाली के अनुसार ही एकत्र करने के आदेश दिए थे।
