
चंडीगढ़: अमृतसर से भाजपा सांसद नवजोत सिद्धू के राजनीतिक यू-टर्न को लेकर राजनीतिक हलकों में चर्चा शुरू हो गई है। नवजोत सिंह सिद्धू पिछले साल 10 दिसम्बर से अमृतसर से गायब चले आ रहे हैं। उनकी गुमशुदगी के पोस्टर लगने व अमृतसर लोकसभा हलके में उनकी राजनीतिक सरगर्मियां ठप्प हो जाने से पार्टी में उसका विरोधी खेमा मामले को जब उठाने लगा तो सिद्धू ने फैसला किया कि वह 4 सितम्बर को अमृतसर में पहुंचकर रोड शो करेंगे।
अपने हलके से एक साल गायब होने के कारण अमृतसर लोकसभा हलके में यह चर्चा शुरू हो गई थी कि भाजपा इस हलके से अपना नया उम्मीदवार खड़ा करेगी। सिद्धू के साल बाद प्रकट होने के कारण फिर से यह चर्चा चल पड़ी है कि सिद्धू व उनकी पत्नी डा. नवजोत कौर सिद्धू भाजपा में ही रहकर सरगर्मियां करेंगे। डा. नवजोत कौर सिद्धू 10 दिन पहले पार्टी हाईकमान के पास यह शिकायतें लेकर गई थीं कि अमृतसर को 100 करोड़ की ग्रांट पंजाब सरकार ने नहीं दी।
इस कारण वह भी राजनीति छोड़ देंगी। उसने उप-मुख्यमंत्री सुखबीर सिंह बादल के खिलाफ भी बयानबाजी की थी। अब नवजोत कौर सिद्धू नए सिरे से राजनीति करने लगी हैं। उसने भाजपा मंत्री अनिल जोशी समेत अमृतसर से संबंधित भाजपा के कई वरिष्ठ नेताओं के साथ खुद जाकर बैठकें की हैं। अब सिद्धू फैमिली चाहती है कि अमृतसर में उनका गुम हुआ आधार फिर से पैदा किया जा सके।
भाजपा सूत्रों ने बताया कि नवजोत सिंह सिद्धू से पार्टी हाईकमान भी नाराज थी कि वह लगातार एक साल से पार्टी से दूरी बनाकर चल रहे हैं। सिद्धू पहले बिग बॉस प्रोग्राम, फिर क्रिकेट कामैंट्री में और अब टी.वी. शो में व्यस्त हैं। अब सिद्धू के रोड शो प्रोग्राम की कामयाबी से यह पता चलेगा कि लोगों में उसका अब आधार है भी या कम हो गया है।
यह चर्चा भी है कि नवजोत कौर सिद्धू ने पहले भाजपा नेताओं के साथ नाराजगी मोल ली थी, उसके बाद पंजाब के उप मुख्यमंत्री व मुख्यमंत्री के साथ भी नाराजगी हासिल कर ली है, जो कि नवजोत सिंह सिद्धू के कहने पर ही किया गया था। अब उन दोनों के लिए राजनीतिक मैदान साफ नहीं होगा।
