
शिमला। पहाड़ी राज्य की लाइफ लाइन को बढ़ाने के लिए लोक निर्माण विभाग ने कसरत तेज कर दी है। विभाग ने मुख्य अभियंताओं से लेकर सभी अधिकारियों को एक महीने में डीपीआर (विस्तृत परियोजना रिपोर्ट) तैयार करने के निर्देश दिए हैं। डीपीआर के साथ अधिकारियों को सड़क में आने वाली निजी भूमि के इस्तेमाल की एनओसी भी जुटानी होगी। अधिकारियों की ओर से आने वाली डीपीआर के साथ इसे केंद्र सरकार को भेजा जाएगा। केंद्र की हरी झंडी मिली तो हिमाचल के सड़क से महरूम रहे ग्रामीण क्षेत्रों तक सड़क सुविधा मिल सकेगी। विभाग के प्रमुख अभियंता प्रदीप चौहान ने डीपीआर को लेकर सभी अधिकारियों को निर्देश दे दिए हैं।
प्रदेश में 17,449 गांव है। इनमेें से 9788 गांव सड़क सुविधा से जुड़ गए हैं। 7661 गांव ऐसे हैं, जहां पर अभी तक सड़क नहीं पहुंच सकी है। इन ग्रामीण क्षेत्रों की आबादी भले ही 250 या इससे कम है, लेकिन आधुनिकता के इस दौर में बिना सड़क के इन क्षेत्रों में जिंदगी काफी मुश्किल है। सरकार की ओर अब इन्हें जोड़ने की प्रक्रिया शुरू की है। एक महीने में सभी अधिकारियों को डीपीआर भेजनी होगी। किसी को लक्ष्य विभाग ने तय नहीं किया है, क्योंकि निजी भूमि का एनओसी लेने में मुश्किल आ सकती है। इसलिए एक महीने में अधिक से अधिक सड़कों की डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं।
लोक निर्माण विभाग के प्रमुख अभियंता प्रदीप चौहान ने कहा कि ग्रामीण क्षेत्रों में सड़क सुविधा देने के लिए प्रयास किए जा रहे हैं। इसके लिए डीपीआर तैयार करने के निर्देश दिए हैं। इसमें अधिक से अधिक क्षेत्रों की डीपीआर तैयार की जानी प्रस्तावित है।
