
धारचूला/पिथौरागढ़। कुदरती कहर का अंदाजा 280 मेगावाट की धौलीगंगा बिजली परियोजना के डैम में पटे मलबे से लगाया जा सकता है। 65 मीटर ऊंचे डैम में करीब 40 मीटर तक मलबा पटा है। डैम को खतरे से बचाने के लिए 18 जून के तड़के से डैम का पानी खाली किया गया। डैम से छोड़े गए पानी ने बाढ़ की तीव्रता को बढ़ाने का काम किया। इसका असर नदी घाटी वाले इलाकों में टनकपुर तक रहा।
17 जून से आई बाढ़ के बाद धौलीगंगा में छिरिकिला नामक स्थान पर बने डैम में मलबा भर गया। डैम ओवर फ्लो होने लगा। डैम को टूटने से बचाने के लिए पावर प्रोजेक्ट ने 18 जून के तड़के तीन बजे से डैम से धीरे धीरे पानी छोड़ना शुरू किया। 18 के दिनभर पानी छोड़ने का काम जारी रहा। डैम से करीब एक लाख क्यूसेक से अधिक पानी छोड़ा गया। डैम को खाली न करने से डैम के लिए खतरा उत्पन्न हो सकता था। ऐसी स्थिति में मंजर कुछ और ही होता।
डैम के पूरी तरह सुरक्षित होने की जानकारी मिली है, लेकिन डैम में 40 मीटर तक पटे मलबे को हटाने में काफी समय लगेगा। धौलीगंगा परियोजना के महाप्रबंधक सुधीर कुमार जैन ने बताया कि डैम को बचाने के लिए काफी कम मात्रा में पानी छोड़कर डैम खाली किया गया। कहते हैं डैम पूरी तरह सुरक्षित है।
