धड़ों में बंटे शिमला शहर के कारोबारी

शिमला। व्यापार मंडल शिमला के चुनाव की घोषणा होने के साथ ही शहर के कारोबारियों की धड़ेबाजी खुलकर सामने आ गई है। कारोबारियों के एक धड़े ने शुक्रवार को प्रेस कांफ्रेंस बुलाकर व्यापार मंडल के चुनाव की घोषणा को असंवैधानिक करार दिया। चुनाव तारीख की घोषणा बिना जनरल हाउस बुलाए किए जाने का भी कारोबारियों ने विरोध किया। रविवार को एक गुट ने कारोबारियों की एसडी स्कूल में विशेष बैठक बुलाई है। बैठक में चुनाव की तिथि बदलने और व्यापार मंडल के वर्तमान पदाधिकारियों के खिलाफ समर्थन जुटाने की कवायद शुरू की जाएगी।
शिमला व्यापार मंडल के पूर्व प्रधान कंवलजीत सिंह, प्रदेश व्यापार मंडल के प्रवक्ता राजेंद्र जिंदा और संजीव कुठियाला ने वर्तमान कार्यकारिणी की निंदा की। कारोबारियों ने कहा कि चार वर्षों में व्यापार मंडल एक भी समस्या को हल करने में सफल नहीं हुआ। डेढ़ साल से चुनाव की तिथि को आगे सरकाया जा रहा है। बिना जनरल हाउस बुलाए 17 नवंबर को चुनाव करवाने की घोषणा कर दी गई। 17 नवंबर को गुरु नानक देव की जयंती का पर्व है। कारोबारियों ने कहा कि चुनाव की घोषणा करने से पहले जनरल हाउस बुलाना चाहिए था। जनरल हाउस में चुनाव कमेटी गठित करनी चाहिए थी। चुनाव कब होना है, कौन-कौन चुनाव में भाग ले सकता है, कब नामांकन होगा, इन बिंदुओं पर कमेटी ने विचार करना था। लेकिन, वर्तमान प्रधान और महासचिव ने जल्दबाजी में चुनाव की घोषणा की है।

एमसी दायरे के ही बनाए जाएं सदस्य
संजीव कुठियाला ने कहा कि सदस्यता अभियान के तहत सिर्फ नगर निगम के दायरे में आने वाले कारोबारियों को व्यापार मंडल का सदस्य बनाया जाए। घणाहट्टी और सुन्नी के कारोबारी शिमला व्यापार मंडल के दायरे से बाहर होने चाहिए।

पहले से पंजीकृत सदस्य क्या करें
कारोबारियों ने कहा कि व्यापार मंडल को स्पष्ट करना चाहिए कि 3500 कारोबारी जो पहले से सदस्य हैं, क्या उन्हें भी दोबारा पंजीकरण करवाना होगा।

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