द्रंग के नमक से फिर होगी चांदी

पधर (मंडी)। पिछले कई वर्षों से बंद पड़ी द्रंग और गुम्मा खान को फिर से शुरू करने की कवायद से लोगों को रोजगार की उम्मीद जगी है। प्रदेश सरकार के आग्रह पर केंद्र सरकार ने फिर नमक खानों को चालू करने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। रियासत काल से लेकर मंडी-पठानकोट पर स्थित दोनों नमक खानों में नमक उत्पादन होता रहा है। अस्सी के दशक में द्रंग नमक खान में खनन कार्य किन्हीं कारणों से बंद हो गया। इसके बार भारत सरकार के उपक्रम हिंदुस्तान साल्ट माइन लिमिटेड ने गुम्मा में नमक उत्पादन शुरू किया। यहां लगभग 20 वर्षों तक निरंतर नमक का उत्पादन जारी रहा। वर्ष 1998 के आसपास गुम्मा नमक की पहाड़ी धंसने से नमक खान को बने खतरे को देखते हुए उपक्रम ने यहां नमक खनन कार्य में पूरी तरह रोक लगा दी। इसी दौरान गुम्मा नाले में पहाड़ी धंसने से नमक खान के मुहाने का अस्तित्व भी मिट गया था।
वर्ष 2006 में उपक्रम को नमक खनन में सफलता हाथ लगी। उस दौरान वर्षों से बंद पड़ी द्रंग नमक खान से जब पहली नमक की खेप खान के भीतर से ट्रॉली के जरिये बाहर आई तो क्षेत्रवासियों और खासकर बेरोजगारों में भारी उत्साह दिखा था। वर्ष 2010 के पहले ही महीने रॉयल्टी विवाद के चलते खान में उत्पादन पर राज्य सरकार ने रोक लगा दी। इस मसले को भारत सरकार के उपक्रम ने राज्य सरकार से सुलझाते हुए लगभग 15 लाख की रॉयल्टी अदा करने की हामी भर दी। रॉयल्टी राशि को उपक्रम ने किस्तों में अदा करने की बात स्वीकार करते हुए जब नमक खान को बहाल करने के लिए प्रशासन के माध्यम से ज्वाइंट इंस्पेक्शन करवाया तो वन विभाग का एरिया होने के चलते खनन कार्य में एक और बाधा आड़े आ गई। केंद्र सरकार की ओर से दोनों नमक खानों को दोबारा शुरू करने के लिए लगभग 300 करोड़ के रिवाइविंग प्लान को मंजूरी देने से स्थानीय लोगों में रोजगार की उम्मीद जगी है।
पाली पंचायत के प्रधान दुनी चंद का कहना है कि नमक खान को शुरू करने की मांग वर्षों से कर रहे थे। खान में उत्पादन शुरू होता है तो किसानों और बेरोजगारों को एक बड़ी राहत मिलेगी।

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