
दो लाख के सामान का किराया अगर उससे 15 गुणा हो जाए तो आप चौंक जाएंगे। हरिद्वार में ऐसा ही एक मामला सामने आया है।
रेलवे स्टेशन के गोदाम में 13 साल से रखे खिलौनों के 42 बक्सों का किराया करीब 30 लाख रुपये हो गया है। लेकिन, इन्हें ले जाने कोई नहीं आ रहा है।
खिलौने के 42 बक्से
15 मई 2000 को दिल्ली से खिलौने के 42 बक्से बिना व्यापार कर चुकाए लाए जा रहे थे। वाणिज्य कर विभाग की टीम ने सभी बक्सों को जब्त कर रेलवे के गोदाम में रखवा दिया था।
वाणिज्य विभाग की ओर से छह माह तक खिलौना व्यापारी का इंतजार किया। लेकिन, इसे लेने कोई व्यापारी नहीं आया। राज्य बनने के बाद 9 नवंबर 2000 पूर्व की पत्रावलियां वाणिज्य कर विभाग के लखनऊ कार्यालय भेज दी गई।
30 लाख रुपये हो चुका किराया
उसके बाद न वाणिज्य कर विभाग उत्तराखंड ने पार्सलों की सुध ली न उत्तरप्रदेश वाणिज्य कर विभाग ने।
अब स्थिति यह हो गई है कि रेलवे गोदाम में इनके रखने का किराया करीब 30 लाख रुपये हो चुका है। रेलवे अधिकारियों का कहना वाणिज्य कर विभाग किराया जमा करेगा तभी उनके सुपुर्द माल किया जाएगा।
इनकी भी सुनिए
रेलवे के नियमानुसार कोई भी सामान छह माह तक रखने के बाद उसकी नीलामी की जाती है। यदि रेलवे गोदाम में 42 पार्सल कार्टन पड़े हैं तो उसे दिखाया जाएगा। साथ ही इतने दिन सामान स्टोर में पड़े होने की सूचना मुरादाबाद स्थित वरिष्ठ अधिकारियों को भी दी जाएगी।
– गोपेंद्र कृष्ण दास, स्टेशन अधीक्षक उत्तर रेलवे हरिद्वार
हमने पहले भी वरिष्ठ अधिकारियों को गोदाम में 42 कार्टन पड़े होने की सूचना दी थी। एक बार फिर इनकी नीलामी करने के लिए कहा जाएगा। अधिकारियों के आदेश मिलते ही पार्सलों की नीलामी की जाएगी।
– एके सक्सेना, मुख्य पार्सल पर्यवेक्षक हरिद्वार रेलवे स्टेशन
13 साल पहले रेलवे स्टेशन पर 42 खिलोने के कार्टन जब्त कर रखवाने की सूचना मेरे संज्ञान में नहीं हैं। यदि इतने दिन से कार्टन रेलवे के गोदाम में पड़े हैं तो रेलवे को स्वयं वे पार्सल नीलाम करवाने चाहिए थे। फिर भी मामले को दिखाया जाएगा।
