
शिमला। मिलावटी खानपान और गलत जीवनशैली से हिमाचल में लगभग दो फीसदी बच्चे शारीरिक विकृति वाले पैदा हो रहे हैं। यह खुलासा कमला नेहरू अस्पताल (केएनएच) शिमला में जन्म लेने वाले शिशुओं पर अध्ययन से हुआ है। पिछले सवा साल में ऐसे 28 बच्चों को इलाज के लिए पीजीआई चंडीगढ़ भेजा गया।
कमला नेहरू अस्पताल की गायनी विभाग की पूर्व प्रमुख डा. कुमुदबाला गुप्ता ने एक अध्ययन में पाया कि केएनएच में जन्म लेने वाले कुल शिशुआें में से दो फीसदी शिशु शारीरिक विकार से ग्रस्त होते हैं। उन्होंने बताया कि इस विकृति का कारण कीटनाशकों के प्रभाव वाले खाद्य पदार्थों का सेवन और वर्तमान जीवनशैली है।
उनके अध्ययन की तसदीक हाल ही में आरटीआई से मिली जानकारी में भी हुई है। आरटीआई से मिली जानकारी में बताया गया है कि जनवरी 2012 से लेकर मई 2013 तक जिन 28 शिशुओं को हिमाचल से बाहर उपचार के लिए भेजना पड़ा, उनमें अधिकतर जन्मजात विकृति के थे। आरटीआई में केएनएच में शिशु रोग की सहायक आचार्य डा. मंजूला सूद ने बताया है कि ऐसे बच्चों को एक्सपर्ट सर्जिकल ट्रीटमेंट की जरूरत होती है, इसीलिए उन्हें पीडियाट्रिक्स सर्जरी विभाग पीजीआई रेफर किया गया।
किस तरह के विकार ज्यादा
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-किसी अंग का न होना
– न्यूरो ट्यूब में डिफेक्ट होना
– मस्तिष्क के कई हिस्सों का न होना
– फूड पाइप का बंद होना
– रीढ़ की हड्डी में फोड़ा होना
-हृदय की बनावट में गड़बड़ी
-जुड़वा बच्चों का जुड़ा पैदा होना
कोट्स———-
हिमाचल में जन्मजात विकृति वाले बच्चों की संख्या अब और भी बढ़ गई है। ऐसे अधिकांश शिशुओं का उपचार केएनएच में ही हो जाता है। जटिल मामलों को ही बाहर भेजा जाता है। बचाव के लिए प्रेगनेंसी के बाद लगातार चेकअप करवाना चाहिए। खानपान सुधारना चाहिए।
-डा. कुमुदबाला गुप्ता, पूर्व प्रमुख गायनी विभाग, केएनएच, शिमला
