
शिमला। आईजीएमसी अस्पताल में अब दोपहर बाद भी विशेषज्ञ डाक्टरों को ओपीडी में बैठना होगा। मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने अस्पताल में आधुनिक सेवाओं के उद्घाटन के दौरान यह निर्देश जारी किए हैं। मौजूदा समय में दोपहर बाद अधिकांश विशेषज्ञ डाक्टर ओपीडी से नदारद हो जाते हैं और ओपीडी रेजिडेंट डाक्टरों के हवाले होती है। राज्य स्तरीय अस्पताल होने के कारण प्रदेश के दूर दराज इलाकों से मरीज यहां उपचार के लिए आते हैं। विशेषज्ञ डाक्टर न मिलने से उनके हाथ मायूसी ही लगती है।
सुबह साढ़े नौ बजे से एक बजे तक ओपीडी में विशेषज्ञ डाक्टर उपलब्ध रहते हैं। इसके बाद ओपीडी में आने से गुरेज करते हैं। तर्क रहता है कि उन्हें कॉलेज में अध्यापन कार्य भी करना पड़ता है। इसके अलावा विभाग के भी कई काम होते हैं, जिसके लिए समय चाहिए। आईजीएमसी के एडिशनल डायरेक्टर डा. एनके लट्ठ ने कहा कि मुख्यमंत्री के आदेशानुसार अब दोपहर बाद चार बजे तक कंसलटेंट को भी ओपीडी में बैठकर मरीजों को देखना होगा।
आर्थो के विभागाध्यक्ष से मांगा स्पष्टीकरण
आर्थो विभाग की कार्यप्रणाली को लेकर मुख्यमंत्री वीरभद्र सिंह ने प्रधान सचिव स्वास्थ्य को निर्देश दिए कि वे महकमे के विभागाध्यक्ष से इस बारे में जवाब तलब करें। वीरभद्र सिंह ने कहा कि मरीजों के इलाज में किसी तरह की कोताही बर्दाश्त नहीं की जाएगी। लापरवाह डाक्टरों को बख्शा नहीं जाएगा।
शिलान्यास पट्टिकाओं पर भड़के सीएम
भाजपा शासन काल में आईजीएमसी में लगाई गई शिलान्यास पट्टिकाओं को देखकर सीएम भड़क गए। यहां धूमल सरकार की शिलान्यास पट्टिकाएं लगी हुई हैं जिसमें अभी काम भी शुरू नहीं हुआ है। सीएम ने कहा कि उनके कार्यकाल में ही आईजीएमसी में बेहतर विस्तार किया गया है। अस्पताल का आधुनिकीकरण कांग्रेस सरकार की देन है।
आरडीए ने मांगा हॉस्टल
रेजिडेंट डाक्टर एसोसिएशन के अध्यक्ष डा. राजीव चौहान ने मुख्यमंत्री से मिलकर हॉस्टल सुविधा देने की मांग उठाई। मौजूदा समय में रेजिडेंट डाक्टरों के लिए केवल साठ कमरों का हॉस्टल है। मांग की है कि मौजूदा समय में 250 रेजिडेंट डाक्टर हैं। एसोसिएशन ने दावा कि सीएम ने उन्हें आश्वस्त किया कि लोक निर्माण विभाग से एस्टीमेट लेकर दो फेज में हॉस्टल का निर्माण किया जाएगा।
