देहरादून में आसाराम के एक अवैध काम का खुलासा

देहरादून के सहस्त्रधारा रोड स्थित जिस आसाराम आश्रम में उनके भक्त हर हफ्ते प्रवचन सुनने जुटते हैं, वह अवैध है।

चार साल पहले आश्रम के अधिकांश हिस्से का निर्माण मसूरी देहरादून विकास प्राधिकरण (एमडीडीए) से नक्शा स्वीकृत कराए बिना किया गया।

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मामला सामने आया तो एमडीडीए ने 14 अक्तूबर 2009 को आश्रम को नोटिस जारी किया।

कुछ माह पहले आश्रम पदाधिकारियों ने निर्माण की कंपाउंडिंग के लिए नक्शा तो जमा कराया है, लेकिन इस पर भी एमडीडीए अभियंताओं ने आपत्ति लगाई है। अब आपत्ति का निस्तारण न होने पर आश्रम को सील करने की कार्रवाई की जा सकती है।

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नतमस्तक रहे अफसर
आसाराम का आश्रम अवैध होने और नोटिस जारी होने के बावजूद चार साल तक एमडीडीए के अफसर यहां कार्रवाई के नाम पर हाथ बांधे रहे। अब आसाराम से जुड़ा विवाद सामने आने के बाद अमर उजाला ने तफ्तीश की तो यह जानकारी भी सामने आई।

ये निर्माण अवैध
एमडीडीए की ओर से जारी नोटिस के मुताबिक आश्रम में भूतल पर किए गए निर्माण अवैध हैं। इनमें एक बड़ा हाल, प्रचार सामग्री और आयुर्वेदिक दवाएं बेचने की दुकान और कई कमरे शामिल हैं।

यह है कंपाउंडिंग
एमडीडीए से स्वीकृत नक्शे के विपरीत निर्माण या बिना नक्शे के निर्माण करने वाले लोग बाद में एमडीडीए के पास नक्शा जमा करा देते हैं। एमडीडीए कुछ शुल्क वसूल कर नक्शे को स्वीकृति दे देता है, जिसके बाद निर्माण वैध माना जाता है। हालांकि, कंपाउंडिंग की प्रक्रिया और तारीख एमडीडीए ही तय करता है।

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आसाराम के आश्रम का निर्माण अवैध है। इसके लिए एमडीडीए से मानचित्र स्वीकृत नहीं है। कंपाउंडिंग के लिए आश्रम की ओर से नक्शा जमा किया गया है, लेकिन उस पर भी अभियंताओं ने आपत्ति लगाई है। आपत्ति का निस्तारण न किया गया तो एमडीडीए की ओर से आश्रम को सीलिंग करने के लिए नोटिस जारी किया जाएगा।
– बंशीधर तिवारी, सचिव एमडीडीए

हमने विकास शुल्क चार साल पहले ही एमडीडीए में जमा कर दिया था। इसके साक्ष्य हमारे पास उपलब्ध हैं, लेकिन एमडीडीए की ओर से जानबूझकर आश्रम के मामले को लटकाया जा रहा है।

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