
कुल्लू। शिक्षा विभाग ने खराब रिजल्ट देने वाले स्कूल अध्यापकों पर शिकंजा कसना शुरू कर दिया है। लगातार दो साल तक खराब रिजल्ट देने वाले अध्यापकों की सालाना वेतन वृद्धि पर रोक लगा दी जाएगी। सूबे में जिन स्कूलों का परिणाम 25 फीसदी कम रहा, उन पर यह नियम लागू होगा।
जिला उच्च शिक्षा उप निदेशक जगदीश शर्मा ने इसकी पुष्टि की है। शिक्षा विभाग के इस कड़े फरमान के बाद अध्यापकों पर अच्छा परिणाम लाने का दबाव पड़ गया है। कुल्लू जिले में इस साल दसवीं तथा जमा दो की परीक्षा में कई स्कूलों का परिणाम संतोषजनक नहीं रहा है। लिहाजा, इन स्कूलों के अध्यापकों के समक्ष अगले साल के स्कूल परिणाम को बेहतर करने की चुनौती खड़ी हो है।
शिक्षा विभाग ने प्रारंभिक स्तर पर परिणाम में सुधार लगाने के लिए स्कूल के प्रिंसिपल व मुख्याध्यापकों को चेतावनी भी दी है। विभाग का मानना है कि इस कवायद से सरकारी स्कूलों में शिक्षा स्तर बेहतर होगा। हाल ही के दिनों में जिला कुल्लू के राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला लगौटी का रिजल्ट बेहद खराब रहा है। स्कूल में 109 छात्रों ने परीक्षा दी थी। इनमें से 86 छात्र-छात्राएं फेल हुए हैं। 21 छात्र पास और दो की कंपार्टमेंट आई है। मात्र 19 फीसदी परिणाम रहने से अभिभावकों ने शिक्षा के स्तर पर सवाल उठाते हुए स्कूल प्रबंधन को घेरा है।
राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला शवाड़ का भी यही हाल रहा है। यहां पर 45 विद्यार्थियों में से 11 छात्र-छात्राएं पास हुए हैं। स्कूल का परिणाम 25 फीसदी से कम रहा है। जिला उच्च शिक्षा उप निदेशक जगदीश शर्मा ने कहा कि 27 मई को जिले के सभी स्कूलों के प्रिंसिपल व मुख्याध्यापकों के साथ दो दिवसीय बैठक रखी गई है। सभी से दसवीं तथा जमा दो के परिणाम की रिपोर्ट जमा करने को कहा है।
जिन स्कूलों का परिणाम 25 प्रतिशत से कम रहता है, यह पॉलिसी उन स्कूलों पर लागू है। शिक्षा गुणवत्ता की बेहतरी के लिए विभाग इस पॉलिसी को सख्ती से लागू करता आया है।
डा. अमर देव, संयुक्त निदेशक उच्च शिक्षा शिमला
