
मंडी। जिला स्वास्थ्य विभाग की ओर से नगवाईं में लिए दालचीनी तथा सेपूबड़ी के सैंपल फेल पाए गए हैं। कंडाघाट स्थित फूड टेस्टिंग लैब से मिली रिपोर्ट में इसका खुलासा हुआ है। स्वास्थ्य विभाग ने पिछले दिनों नगवाईं में सैंपल भरने की कार्रवाई को अंजाम दिया था। अलग-अलग कारोबारियों के दालचीनी और सेपूबड़ी का संदेह के आधार पर एक-एक सैंपल लिया गया था। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मंडी एलडी ठाकुर ने इसकी पुष्टि की है। इससे पूर्व मंडी शहर में एक कारोबारी के यहां से मिस ब्रांडेड खाद्य पदार्थ, दालचीनी के सैंपल लिए गए थे। वे भी रिपोर्ट में फेल पाए गए थे। इसी आधार पर नगवाईं में दालचीनी का सैंपल लिया गया है, जो कंडाघाट लैब से आई रिपोर्ट में फेल पाया गया है। रिपोर्ट में दालचीनी के इस सैंपल को कैसिया बताया गया है। कैसिया तथा दालचीनी अलग-अलग हैं। कैसिया सेहत के लिए हानिकारक है। इसके अलावा यहां सेपूबड़ी का सैंपल पैकेट में मेनुफेक्चरर का नाम, खराब होने की तिथि न होने की सूरत पर लिया गया था। रिपोर्ट में यह सैंपल मिस ब्रांडेड पाया गया है। इस पर जिला स्वास्थ्य विभाग की टीम ने शिकंजा कस दिया है। विभाग ने दोनों खाद्य पदार्थ की सैंपल रिपोर्ट आने के बाद अब मामले कोर्ट को भेजने की प्रक्रिया शुरू कर दी है। एफएसएसए एक्ट के मुताबिक दोनों कारोबारियों को कोर्ट द्वारा अभियोग साबित होने पर तीन-तीन लाख तक जुर्माना किया जा सकता है। नगवाईं में जिला स्वास्थ्य विभाग ने दुकान में खुली रखी गई दालचीनी का सैंपल लिया था जो रिपोर्ट में कैसिया आया है। ऐसे में पैकेट के अलावा खुली बेची जा रही दालचीनी भी कैसिया हो सकती है।
इधर, स्वास्थ्य विभाग ने लोगाें से अपील की है कि दालचीनी एवं अन्य खाद्य सामग्रियों को जांच परख कर ही लें। जिला खाद्य सुरक्षा अधिकारी मंडी एलडी ठाकुर ने बताया कि शनिवार को कंडाघाट लैब से सैंपल रिपोर्ट मिली है। जिसमें दालचीनी तथा सेपूबड़ी के लिए गए सैंपल फेल पाए गए हैं। उधर, जिला स्वास्थ्य अधिकारी डा. एनके भारद्वाज का कहना है कि दालचीनी को खरीदती बार उपभोक्ता इसे गहनता से जांच लें। यदि उपभोक्ता को लगता है कि दालचीनी नकली है तो विभाग से संपर्क किया जा सकता है।
