दालचीनी के सैंपल फेल, डेढ़ लाख जुर्माना

शिमला। राजधानी में नकली दालचीनी बेचने वाले तीन कारोबारियों पर डेढ़ लाख रुपये का जुर्माना किया गया है। नगर निगम की स्वास्थ्य शाखा ने पिछले माह संजौली और ढली से दालचीनी के सैंपल भरे थे। सैंपल फेल होने पर नगर निगम के मुख्य स्वास्थ्य अधिकारी के कोर्ट ने तीनों कारोबारियों पर 50-50 हजार रुपये का जुर्माना लगाया है। न्यू फूड सेफ्टी एंड स्टैंडर्ड एक्ट के तहत कारोबारियों पर कार्रवाई की गई है।
आरटीआई एक्टिविस्ट सुबोध ने हिमाचल सरकार के प्रधान सचिव स्वास्थ्य और निदेशक स्वास्थ्य सेवाएं को पर्यावरणविद सुनीता नारायण की पत्रिका में प्रकाशित ज्योत्स्ना सिंह का शोध लेख भेजकर नकली दालचीनी बेचे जाने के मामले को उजागर किया था। ‘अमर उजाला’ में प्रकाशित खबर में बताया गया था कि भारतीय बाजारों में कृत्रिम सिनामन यानी दालचीनी बिक रही है। इस मसाले का प्रयोग शुगर स्तर कम करने, कोलेस्ट्राल घटाने, आर्थराइटिस का इलाज करने आदि में किया जाता है। यहां सिनामन यानी सिनामोमम जेलानिकम के स्थान कैसिया यानी सिनामोमम कैसिया की बिक्री हो रही है। इस नकली दालचीनी में चूहे मारने की दवा में इस्तेमाल होने वाला एक रसायन क्यूमारिन होता है। कार्रवाई करते हुए निगम की स्वास्थ्य शाखा ने संजौली और ढली में छापेमारी कर तीन दुकानों से सैंपल भरे थे।
ऐसे पहचानें असली दालचीनी को
असली दालचीनी को पेंसिल में लपेटा जाए तो यह टूटती नहीं है जबकि नकली टूट जाएगी। असली दालचीनी पतली होती है जबकि नकली मोटी होती है। दोनों का स्वाद और गंध लगभग एक जैसे ही होते हैं। इसी के चलते पहचान में दिक्कत आती है।

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