
शिमला। हिमाचल प्रदेश सूचना आयोग आरटीआई एक्ट के दुरुपयोग को लेकर तल्ख है। आयोग ने अपने एक आदेश में कहा है कि आरटीआई एक्ट में वाजिब जानकारी नहीं देने पर जिम्मेदार अधिकारी और कर्मचारी पर 25 हजार रुपये तक की पेनल्टी लगाने का प्रावधान है। पर यह भी जरूरी नहीं है कि पब्लिक अथारिटी को सूचना के लिए लगातार दबाव और पेनल्टी के भय में रखा जाए। इससे सरकारी कार्य और इसकी कुशलता पर भी बुरा प्रभाव पडे़गा।
राज्य सूचना आयुक्त केडी बातिश की अदालत ने जिला सोलन के गांव दमरोग में बंदोबस्ती पाथ को लेकर मांगी एक सूचना को लेकर अपील पर यह टिप्पणी की है। अदालत ने कहा है कि आरटीआई अधिनियम के तहत उक्त दरख्वास्त को ग्रहण करना ही गलत था, क्योंकि आवेदक की मांगी गई सूचना इसके दायरे से बाहर है। एक्ट के तहत केवल निश्चित जानकारी ही मांगी जा सकती है। यह पब्लिक अथारिटी की जवाबदेही और भ्रष्टाचार से संबंधित होनी चाहिए। कई नागरिक ऐसी सूचनाएं मांग रहे हैं, जो पिछले लगभग सौ साल से जनता की पहुंच में हैं। किसी भी भूमि के संबंध में कोई सूचना सामान्य कानून में ली जा सकती है। आरटीआई एक्ट लोकतांत्रिक गणतंत्र, सूचनाबद्ध नागरिकता, पब्लिक अथारिटी की कार्यशैली में पारदर्शिता, सरकार की शासितों के लिए जवाबदेही और भ्रष्टाचारमुक्ति की बात करता है। जो सूचना इस दायरे में नहीं आती, उसे आरटीआई एक्ट मेें नहीं दिया जा सकता है। आवेदक की ओर से आरटीआई अधिनियम के तहत दायर की गई दरख्वास्त इसके दायरे से बाहर होने पर खारिज की जाती है।
