
नगरोटा सूरियां (कांगड़ा)। …उसका यह कसूर था कि वह किसी और की बेटी थी? क्या उसका यह गुनाह था कि वह दहेज के लोभियों की मांगों को पूरा नहीं कर पाई? ‘बेटी है अनमोल’ जैसे जागरूकता कार्यक्रमों के बावजूद नगरोटा सूरियां की पंचायत कटोरा के गांव वन तुंगली में ब्याही 28 वर्षीय बेटी कथित दहेज की बलि चढ़ गई।
दस साल पहले नूरपुर के गांव खुशीनगर की नीलम की जब वन तुंगली के लेखराज के साथ शादी हुई थी तो उसे क्या पता था कि शादी के तुरंत बाद ही उसका पति दहेज को बहाना बनाकर उससे मारपीट शुरू कर देगा। नीलम की बुआ निर्मला देवी व दादा साधु राम आरोप लगाते हुए बताते हैं कि आए दिन शराब पीकर उसका पति लेखराज नीलम से मारपीट करता था। दो बार पंचायत में दोनों के बीच राजीनामा भी करवाया गया। लेकिन 29 मई को उनकी बेटी पर ऐसा कहर बरपा कि पति की पिटाई ने उसकी जान ही ले ली। दहेज की बलि चढ़ाई गई नीलम की घटना ने उस समय सबको चौंका दिया, जब मायके वालों ने आक्रोश में आकर शुक्रवार को उसका अंतिम संस्कार उसके ससुराल के आंगन में कर दिया। लोग भी तमाशा देखते रहे। हालांकि पुलिस ने पूरे प्रकरण की वीडियो बनाकर मृतका नीलम के मायके वालों पर कड़ी कार्रवाई करने की बात कही है। लेकिन उस बेटी का क्या, जो पति के हाथों तिल-तिल कर मरती रही और आखिर में उसकी जान चली गई।
उधर, जवाली के एसडीएम सुरेश जसवाल भी घटनास्थल पर जरूर पहुंचे लेकिन तब तक लाश को आंगन में जलाया जा चुका था। वह भी पुलिस को दोषियों की पहचान कर सख्त कदम उठाने के आदेश देकर चले गए। गांव वन तुंगली में ही छह महीनों के भीतर यह दहेज की बलि का दूसरा मामला है। लेकिन घर के आंगन में लाश को जलाने का पहला मामला है, जो प्रशासन पर कई तरह के सवाल उठा रहा है।
