
शिमला। प्रश्न पत्र में खामी को लेकर प्रदेश विवि फिर चर्चा में आ गया है। अब स्नातकोत्तर परीक्षा में मामला सामने आया है। पत्रकारिता विभाग के तीसरे सत्र की परीक्षा में दस की बजाय छह प्रश्नों का प्रश्नपत्र ही बांट दिया। मामला सामने आने के बाद प्रशासन ने चार प्रश्न विभाग के शिक्षकों की मदद से फिर से टाइप करवाए और छात्रों को प्रश्नपत्र के रूप में बांट दिए। मामला सामने आने के बाद विश्वविद्यालय के कुलपति ने पूरे मामले की जांच के निर्देश दे दिए। इस मामले में शीघ्र ही सीईओ को जांच रिपोर्ट सौंपनी होगी। इसके बाद ही प्रिंटिंग प्रेस से लेकर पेपर सैट करने वाले शिक्षकों पर कार्रवाई संभावित है। विश्वविद्यालय के अलावा जिन परीक्षा केंद्रों में अतिरिक्त प्रश्न नहीं पहुंचे तो वहां के छात्रों को राहत देने के लिए प्रशासन शीघ्र ही फैसला लेगा।
इससे पहले भी विश्वविद्यालय में प्रश्नपत्रों का मामला काफी विवादित रहा है। कभी प्रश्नपत्रों में गलतियां आती रही हैं तो कभी प्रश्नपत्र में अन्य विषयों के प्रश्न शामिल किए जाते रहे हैं। ऐसे सभी मामले सामने आने के बाद विश्वविद्यालय प्रशासन की ओर से जांच बिठा दी जाती है, लेकिन जांच रिपोर्ट आने के बावजूद किसी पर कार्रवाई नहीं हो पाती है। यह आलम लंबे अर्से से विश्वविद्यालय परिसर में चला है। विवि की एससीए के महासचिव पीयूष सेवल ने आरोप लगाया कि विवि प्रशासन की गलती का खामियाजा छात्रों को भुगतना पड़ता है। उन्होंने पेपर सैट करने वाले शिक्षकों के खिलाफ शीघ्र ही सख्त कार्रवाई की मांग की है।
विवि के कुलसचिव प्रो मोहन झारटा ने माना कि प्रश्नपत्र में कम प्रश्न थे, मामला ध्यान में आते ही कुलपति ने जांच के आदेश दे दिए हैं। छात्रों को नुकसान न हो, इसके लिए हर संभव प्रयास किए जा रहे हैं
