
रामपुर बुशहर। यहां की दरकाली पंचायत में प्राचीन दकनौल मेला धूमधाम के साथ मनाया गया। दो दिवसीय मेले में फुआलों (भेड़पालकों) की नाटी आकर्षण का मुख्य केंद्र रही। इस नाटी में फुआलों के साथ ही आम लोगों ने भी नृत्य कर मेले की शोभा बढ़ाई। दरकाली में दकनौल मेला सदियों से मनाया जा रहा है। हालांकि, भेड़पालकों की संख्या अब कम हो गई है, लेकिन मेले की प्राचीन परंपरा को वे आज भी संजोए हुए हैं। यह मेला फुआलों (भेड़पालकों) के सम्मान में आयोजित किया जाता है। फुआल कंडे (ऊंची चोटियों) से लोसर समेत तरह-तरह से सुगंधित फूल लाकर इनकी मालाएं बनाते हैं, जो मेले के दिनलोगों को पहनाई जाती हैं। मेहनत से बनाई इन मालाओं को पहनाने की एवज में लोग भेड़पालकों को इच्छानुसार धन राशि भी देते हैं। परंपरा के अनुसार फुआल फूलों की माला सबसे पहले देवता लक्ष्मी नारायण को पहनाते हैं। उसके बाद ही अन्य लोगों को मालाएं पहनाई जाती हैं। मेले के पहले दिन 16 जुलाई को फुआलों ने पहले देवता संग नृत्य किया और इसके बाद मंदिर परिसर में नाटी डाली। नाटी की शुरुआत फुआल ही करते हैं। फुआलों के नाचने के बाद ही अन्य लोग नाटी में सबसे आगे नाच सकते हैं। फुआलों ने ऐसी नाटी डाली कि लोग अपने आपको नाचने से नहीं रोक पाए। दूर-दूर से पहुंचे लोगों ने फुआलों संग खूब नाटी डाली। बुधवार को अंतिम दिन देर शाम तक मंदिर परिसर में नाटी का दौर चला। मेले में दरकाली के अलावा सेरी मझाली, मुनिश, काशापाट आदि क्षेत्रों के लोग भी पहुंचे थे। इससे पहले 15 जुलाई को लोगों ने देवता लक्ष्मी नारायण का जन्मदिन भी धूमधाम से मनाया।
