
रोहडू। उच्च न्यायालय के आदेशों के बाद भी पब्बर नदी में अवैध खनन बदसतूर जारी है। खनन माफिया से जुड़े लोग नदी तट से रात-दिन रेत और पत्थर निकालने का कार्य कर रहे हैं। हालांकि, खनन रोकने के लिए एसडीएम रोहडू की अध्यक्षता में एक कमेटी का गठन भी किया गया है। सभी विभागों के अधिकारियों को चालान काटने की शक्तियां भी प्रदान की गई हैं। बावजूद इसके, खनन रोकने की मुहिम मात्र कमेटी के गठन तक ही सीमित रह गई है।
खनन माफिया उच्च न्यायालय के आदेशों की धज्जियां उड़ाकर धड़ल्ले से पब्बर नदी को छलनी कर रहा है। नदी तट पर रात के समय खनन का कार्य अधिक किया जा रहा है। उच्च न्यायालयों के निर्देशों के बाद प्रशासन ने खनन रोकने की मुहिम शुरू की। इसके तहत दो सप्ताह पहले कमेटी का गठन भी किया गया। सभी विभागों के अधिकारियों को चालान बुक देकर खनन करने वालों का चालान काटने की शक्ति दी गई। साथ ही खनन माफिया पर छापामारी करने के लिए उड़नदस्ते भी गठित किए गए हैं। लेकिन, कोई भी विभाग खनन रोकने के प्रति गंभीरता नहीं दिखा रहा है। खनन विभाग अवैध खनन पर अंकुश लगाने का दावा तो कर रहा है। अब सवाल उठता है कि अगर खनन पर अंकुश लगा है तो क्षेत्र में बने भवनों के लिए रेत और रोड़ी कहां से आ रही है? सरकारी कार्यों के लिए रेत और रोड़ी ठेकेदार कहां से ला रहे हैं? जबकि, क्षेत्र में नदी तट पर स्थित अधिकांश क्रेशरों की भी लीज भी समाप्त हो गई है। एसडीएम रोहडू यशपाल सिंह वर्मा ने माना कि खनन माफिया सक्रिय है। उन्होंने बताया कि खनन रोकने के लिए कमेटी का गठन किया गया है। इसमें सभी विभागों को चालान बुक देकर चालान काटने की शक्ति दी गई है। इस संबंध में अगले सप्ताह फिर बैठक बुलाई जाएगी। उधर, खनन अधिकारी एमएम जोगटा ने बताया कि लोनिवि, वन विभाग, आईपीएच तथा राजस्व विभाग के सभी अधिकारियों को चालान काटने की शक्ति दी गई है। साथ ही खनन रोकने लिए विभागों में दिन भी बांटे गए हैं। लेकिन, कोई भी खनन रोकने के लिए मुस्तैद नहीं है। उन्होंने बताया कि उन्होंने अब तक छह चलान काटे हैं। माइनिंग गार्ड के पद खाली होने के कारण दिक्कत हो रही है।
