
मंडी। मनरेगा के तहत मजदूरी की अदायगी समय पर न करना अब अधिकारियों पर भारी पड़ेगा। प्रशासन ऐसे अफसरों की जेब से यह राशि वसूल करेगा। इसमें 25 से 50 फीसदी राशि अधिकारियों से वसूलने का प्रावधान किया गया है। डीसी देवेश कुमार ने कहा कि काम पूरा होने के बाद पंद्रह दिन तक देरी करने पर 25 और इससे अधिक देरी होने पर अधिकारियों के जेब से 50 फीसदी तक राशि कुल मजदूरी की वसूली जाएगी।
उन्होंने कहा कि मनरेगा में शुरुआती दौर में पिछड़ने के बाद मंडी जिला फिर से नंबर वन की दौड़ में शामिल हो गया है। कहा कि जिले की 473 में से 337 पंचायतें मनरेगा के तहत ऑनलाइन हो चुकी हैं। मनरेगा कामगारों की मजदूरी की अदायगी सीधे उनके बैंक खातों में हो रही है। ऐसा करने वाला मंडी प्रदेश का पहला जिला बनने जा रहा है।
उन्होंने कहा कि मनरेगा कार्य में देरी करने वाले अधिकारियों से जवाबतलबी होगी। मनरेगा के तहत अब जिला में 23 कार्य दिवस हो चुके हैं।
53 करोड़ 90 लाख रुपये खर्च किए गए हैं। इसमें अकेले सराज ब्लॉक में 10 करोड़ 98 लाख रुपये खर्चे गए हैं। मनरेगा में महिलाओं की भागीदारी अभी भी अधिक है। मंडी जिले में इस साल 17 लाख 25 हजार महिलाओं को रोजगार मिला है। मनरेगा के तहत जल संग्रहण ढांचों को प्राथमिकता दी जा रही है। जिले के 278 हाई और जमा दो स्कूलों में जल संग्रहण ढांचा बनाने की स्वीकृति दी है। इसमें से 51 का काम पूरा हो चुका है। इस मौके पर अतिरिक्त उपायुक्त गोपाल चंद, परियोजना अधिकारी डीआरडीए भावना शर्मा और अन्य अधिकारी मौजूद रहे।
