
देहरादून। राजधानी में बीते आठ साल में 99941 ड्राइविंग लाइसेंस बनाए गए, लेकिन इनमें से 98627 अवैध हैं। चौंकिए नहीं, सूचना का अधिकार के तहत मांगी गई जानकारी तो कुछ यही इशारा कर रही है।
खुड़बुड़ा निवासी हरजिंदर सिंह ने परिवहन विभाग से दस जुलाई 2012 को सूचना मांगी कि वर्ष 2006 से अब तक दून अस्पताल के मेडिकल के आधार पर कितने ड्राइविंग लाइसेंस बने, लेकिन समय से सूचना न मिलने पर उन्हें राज्य सूचना आयोग का दरवाजा खटखटाना पड़ा। आयोग के हस्तक्षेप के बाद आठ जुलाई को लोक सूचना अधिकारी एवं सहायक संभागीय परिवहन अधिकारी संदीप सैनी ने बताया कि अब तक विभाग 99941 लाइसेंस बना चुका है। इसी आरटीआई पर दून चिकित्सालय के अधीक्षक ने बताया कि दून अस्पताल से अब तक 1314 ही मेडिकल लाइसेंस के लिए जारी किए गए। अब बाकी मेडिकल कहां बने, बने भी या नहीं इस सवाल का जवाब परिवहन विभाग के पास नहीं है। दूसरी ओर, दून अस्पताल में पुराने रजिस्टर न होने की बात कही जा रही है। ऐसे में यह सवाल उठ रहा है कि क्या बाकी मेडिकल फर्जी थे या फिर उनसे मिलने वाला मेडिकल शुल्क हजम कर लिया गया।
मेडिकल बनाने के लिए पहले 32 रुपये शुल्क लिया जाता था। कई बार लोग शुल्क दिए बिना ही मेडिकल बनवा लेते थे। ऐसे में इसका कोई ब्योरा रजिस्टर में नहीं रहता था। सितंबर 2012 से मेडिकल शुल्क 150 रुपये हो गया है। अब रजिस्टर में पूरा विवरण दर्ज करने का सख्त निर्देश दिया गया है। पहले रजिस्टर न होने की वजह से ही यह अंतर आया होगा।
-आरएस असवाल, प्रमुख चिकित्सा अधीक्षक
