तो डीसी ऑफिस के बरामदे में डालेंगे डेरा

चंबा (गीता) अनदेखी से बिफरे चमेरा चरण तीन विस्थापित कल्याण संघ के सदस्यों ने चेताया है कि एक सप्ताह के अंदर उनकी समस्या को समाधान नहीं हुआ तो सभी प्रभावित अपने परिवारों सहित उपायुक्त कार्यालय के बरामदे में रहने को मजबूर हो जाएंगे और वे उपायुक्त कार्यालय से तब तक नहीं हटेंगे जब तक उनकी समस्या को कोई हल नहीं निकल जाता है।
संघ के सदस्यों का प्रतिनिधिमंडल एडीएम अश्वनी राज शाह से मिला। इसमें उन्होंने चमेरा जल विद्युत परियोजना चरण तीन की धरबाला स्थित टनल में रिसाव को लेकर एक ज्ञापन जिला प्रशासन के माध्यम से राष्ट्रीय मानवाधिकार आयोग दिल्ली को भेजा है। विस्थापितों रोहित गुप्ता, काहन सिंह, देवी लाल, कर्म देव, रमेश शर्मा, एचके प्रिंजा, अशोक शर्मा, सुरेश शर्मा, राजेश शर्मा, राकेश, जगदीश, ललित ठाकुर, चीनो देवी, सुनील शर्मा, निकेश शर्मा, नेक राम, ओम प्रकाश, पवन कुमार, मनोज कुमार, कौशल्या देवी, जीवो देवी, रजनी देवी, विवेक कुमार, देशराज और मुंशी राम ने बताया कि 9 अप्रैल 2012 को एनएचपीसी की सर्जसाफ्ट की टनल से भारी रिसाव होने से कई परिवार प्रभावित हुए हैं। इसके बाद प्रभावित परिवारों को किराये के मकानों में ठहराया गया था। अभी तक प्रभावित उन्हीं किराए के मकानों में ठहरे हुए हैं। एनएचपीसी की ओर से उन्हें किसी दूसरी जगह बसाने के प्रयास नहीं किए जा रहे हैं।
उन्होंने कहा कि इस संदर्भ में विस्थापित कई बार सीएम, वन मंत्री और जिला प्रशासन को लिखित तौर पर अवगत करवा चुके हैं। इसके बावजूद आज दिन तक उनकी समस्या का कोई भी हल नहीं हो पाया है। अब सभी विस्थापितों ने निर्णय लिया है कि वे सभी एनएचपीसी से किराया लेना बंद कर देंगे और वे अपने पुराने घरों में आकर रहना शुरू कर देंगे। इस दौरान किसी भी परिवार को कोई भी क्षति पहुंचती है, तो इसके लिए प्रदेश सरकार, जिला प्रशासन व एनएचपीसी उत्तरदायी होंगे।

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