
शिमला। अक्षम बच्चों की पढ़ाई के लिए आए पौने दो करोड़ रुपये लैप्स हो सकते हैं। केेंद्र ने वर्ष 2010-11 के लिए इंटीग्रेटिड एजूकेशन फॉर डिस्एबल्ड एट सेकेंडरी स्टेज (आईईडीएसएस) योजना के तहत 1 करोड़ 68 लाख का बजट मंजूर किया था। यह चार साल में खर्च नहीं हो पाया है। वर्ष 2012 और 13 में रि-अप्रूवल लेने के बावजूद डेढ़ करोड़ से अधिक जस के तस पड़े हैं। सभी जिलों में आईईडीएसएस नाम से मॉडल इनक्लूसिव स्कूल खुलने थे, लेकिन अभी सिर्फ चार जिलों में ऐसे मॉडल स्कूल चल रहे हैं। इनमें वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला पोर्टमोर शिमला, वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला जोगिंद्रनगर, वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नगरोटा बगवां और वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला नाहन शामिल हैं। इन स्कूलों में बच्चों को हॉस्टल सुविधा दी गई है। अक्षम बच्चों के उत्थान को कार्य कर रही उमंग संस्था के अध्यक्ष अजय श्रीवास्तव ने बताया कि जिन चार स्कूलों में विभाग इन बच्चों के लिए सुविधा देने की बात कर रहा है, वह नाममात्र ही है। प्रशासनिक अधिकारियों की लापरवाही से करोड़ों की राशि का उपयोग नहीं हो रहा है। 12 महीने के लिए दी राशि 42 माह बाद भी खर्च नहीं हुई है। 31 मार्च, 2014 तक राशि खर्च नहीं होती है तो यह लैप्स हो सकती है। अभी तक विभाग करीब 20 से 25 लाख ही खर्च कर पाया है।
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यह होना था स्कीम में
आईईडीएसएस स्कीम में प्रदेश के वरिष्ठ माध्यमिक स्कूलों में पढ़ रहे अक्षम बच्चों को हर तरह की शैक्षणिक सुविधाएं दी जानी थीं। इनमें स्पेशल एजूकेटर से लेकर पढ़ाई के लिए विशेष उपकरण, वर्दी, किताबें, हॉस्टल सुविधा, टॉकिंग सॉफ्टवेयर सुविधा वाले कंप्यूटर, केयर गिवर सहित कई सुविधाएं शामिल हैं। अधिकतर स्कूलों में बच्चों के लिए न तो हॉस्टल सुविधा है और न ही स्पेशल एजूकेटर नियुक्त किए गए हैं। पिछले चार साल में प्रदेश शिक्षा विभाग इस फंड को खर्च ही नहीं कर पाया है।
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कोट
12 जिलों में चाइल्ड विद स्पेशल नीड के बच्चों के लिए स्कूल चल रहे हैं। चार स्कूलों में हॉस्टल सुविधा है। विभिन्न हेड्स में स्कीम की करीब 80 प्रतिशत राशि खर्च कर चुके हैं। स्कूलों में बच्चों को हर सुविधा दी जा रही हैै।
– डा. अमरदेव सिंह, संयुक्त निदेशक; उच्च शिमला एवं इंचार्ज आईईडीएसएस सेल
