तो क्या किले में ही

नूरपुर (कांगड़ा)। नूरपुर के ऐतिहासिक किले के भीतर चल रहे ब्वॉयज सीनियर सेकेंडरी स्कूल को आर्य कॉलेज भवन में शिफ्ट करने की कवायद सिरे चढ़ती नजर नहीं आ रही। हालांकि, केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय ने अक्तूबर 2012 में नए कॉलेज भवन के निर्माण के लिए रामपुरी उप-महाल में चिन्हित 1. 80 हेक्टेयर वन भूमि को उच्च शिक्षा विभाग के नाम हस्तांतरित करने की मंजूरी प्रदान कर दी थी। उच्च शिक्षा विभाग ने करीब चार माह पूर्व नए कॉलेज भवन निर्माण के लिए चिन्हित वन भूमि की नेट प्रेजेंट वेल्यू (एनपीवी) और प्रतिपूर्ति पौधरोपण राशि भी जमा करवा दी थी, लेकिन भूमि अधिग्रहण से जुड़ी कागजी औपचारिकताओं के अभी तक पूरा नहीं होने के कारण नए कॉलेज भवन का निर्माण आगे सरकता नहीं दिख रहा। वजह यह है कि केंद्रीय वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की शर्तों के मुताबिक नए कॉलेज भवन के ले आउट प्लान समेत इन्वायरमेंटल क्लीयरेंस तथा प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड का अनापत्ति प्रमाण पत्र (एनओसी) जमा करवाने के उपरांत ही उच्च शिक्षा विभाग को भूमि हस्तांतरण की अंतिम मंजूरी मिल पाएगी। इसके लिए कॉलेज प्रशासन ने संबंधित विभागों के पास आवेदन कर रखा है।

प्रदूषण बोर्ड ने रखी सर्टिफिकेट की शर्त
प्रदूषण कंट्रोल बोर्ड ने मंक डंपिंग सर्टिफिकेट मिलने के बाद ही एनओसी जारी करने की शर्त लगा दी है। जबकि, वन एवं पर्यावरण मंत्रालय की ओर से नए कॉलेज भवन के लिए चिन्हित भूमि के हस्तांतरण की एक साल पहले मंजूरी मिल गई थी। कॉलेज के प्राचार्य अरविंद पठानिया ने बताया कि ले-आउट प्लान तथा एनओसी के लिए संबंधित विभागों के पास आवेदन किया गया है, लेकिन अभी तक बात सिरे नहीं चढ़ पाई है।

किसी भी बिल्ंिडग का ले-आउट प्लान संबधित विभाग से प्रशासनिक मंजूरी मिलने के बाद तैयार किया जाता है। जबकि, कॉलेज प्रशासन की ओर से नए भवन के निर्माण को लेकर ड्रांइग के लिए आवेदन के अलावा कोई अन्य कागजात जमा नहीं करवाए गए हैं।
(इंद्र सिंह उत्तम, एक्सईएन, लोनिवि नूरपुर)

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