तो किस मोड़ पर पहुंचेगा कोल बांध में आंदोलन

बरमाणा (बिलासपुर)। कोल बांध परियोजना में विस्थापितों का आंदोलन अब किस मोड़ पर जाएगा इसको लेकर यहां चरचा का बाजार गर्म है। अपनी मांगे मनवाने के लिए विस्थापितों को संघर्ष जारी रखना भी अब आसान नहीं होगा। वहीं, निर्माण कार्य के अंतिम पड़ाव पर खड़ी एनटीपीसी की दिक्कतें भी कम होने का नाम नहीं ले रही। विस्थापित पीछे हट नहीं सकते और संघर्ष जारी रखा तो धारा 144 का उल्लंघन हो जाएगा। जिला प्रशासन के लिए भी कानून व्यवस्था बनाए रखना चुनौती बन गया है।
प्रशासन ने प्रोजेक्ट एरिया में धारा 144 लगा दी है। इससे भड़के प्रदर्शनकारियों ने मंगलवार को जिला मुख्यालय में दावा बोल दिया। विस्थापितों की मांगों को लेकर एनटीपीसी और प्रशासन की बेरुखी अब विस्थापितों की प्रतिष्ठा का सवाल बनती जा रही है।
स्थानीय विधायक बंबर ठाकुर की मध्यस्थता में निगम प्रबंधन के साथ हुई वार्ता को विफल करार देते हुए भले ही संघर्ष की कमान युवा नेताओं ने अपने हाथों में ले ली है। कभी विस्थापितों के साथ चलने की बात कहने वाले विधायक भी परियोजना प्रबंधन द्वारा मांगे पूरी करने की बात कहकर इस आंदोलन को भाजपा से जुडे़ लोगों का षड़यंत्र बता रहे हैं लेकिन आंदोलन से परियोजना प्रबंधन की दिक्कतें बढ़ गई हैं। वहीं, विस्थापित भी अपना संघर्ष जारी रखे हुए हैं। यहां दो महीने तक धारा 144 लागू रहेगी। ऐसे में यहां आम चरचा है कि दो महीने की इस अवधि में परियोजना का कार्य भी पूरा हो सकता है।
युवा एडवोकेट बाबूराम ठाकुर ने कहा है कि विधायक व अन्य स्थानीय नेताओं द्वारा जिन मांगों को निगम द्वारा मान लिए जाने का दावा किया है विस्थापित उनसे सहमत नहीं है। उनका कहना है कि मौजूदा प्रारूप में रोजगार के लिए एक निजी कंपनी को अनुबंधित किया गया है जिसे एनटीपीसी का एक उपक्रम बताया जा रहा है।
विस्थापितों की मांग है कि इस कंपनी को हटाकर अनुबंधित कर्मचारियों की नियुक्ति के बजाय निगम स्वयं विस्थापितों को स्थायी रूप से परियोजना में रोजगार दिलाए। इसके साथ विस्थापितों के प्रत्येक परिवार से एक व्यक्ति को रोजगार देना सुनिश्चित किया जाए। हालांकि, विस्थापित नेता अनिल ठाकुर सभी वर्गों के लोगों का हड़ताल में शामिल होने का दावा कर रहे हैं, किंतु कभी झंडा उठाकर चलने वाले कई लोग अब आंदोलन में नहीं दिख रहे।

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