
चौंतड़ा (मंडी)। स्वास्थ्य और परिवार कल्याण विभाग लडभड़ोल के सौजन्य से राजकीय वरिष्ठ माध्यमिक पाठशाला निमेलरी में बहरेपन पर जागरूकता शिविर आयोजित किया गया। खंड स्वास्थ्य शिक्षक बीरबल वर्मा ने कहा कि बहरापन कोई बीमारी नहीं है। बल्कि, एक शारीरिक कमी है। जो कई लोगों में देखी गई है। व्यक्ति के सुनने की क्षमता 85 डेसिमल तक की होती है। 85 डेसिमल से ज्यादा आवाज हमें बहरेपन की ओर ले जाती है।
कुछ दवाइयों स्ट्रोप्टोमाइसिन,आईव्यूप्रोफेन, एंटीबायोटिक्स का आवश्यकता से अधिक सेवन भी बहरेपन की ओर ले जा सकता है। आज मोबाइल हेड फोन, डीजे का शोर, प्रेशर हॉर्न की आवाज को लगातार और प्रतिदिन 85 डेसिमल से अधिक सुनने से बहरापन की शिकायतें बढ़ रही हैं। जोरदार ध्वनि अधिक न सुने, इसके लिए कानों को हाथों से ढक लें।
बच्चों के कान खुजलाने, पीक बहने आदि कान में संक्रमण कर सकते हैं। ऐसी स्थिति में चिकित्सक की सलाह के बिना कोई भी दवाई कान में न डालें। प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार, पार संस्था के संचालक रत्ती राम ने भी बहरेपन और कान की विभिन्न बीमारियों पर विचार रखे। भाषण प्रतियोगिता का भी आयोजन किया गया। जिसमें मीनाक्षी कुमारी प्रथम, दीपक कुमार दूसरे तथा सोनू कुमार तीसरे स्थान पर रहे। प्रधानाचार्य नरेंद्र कुमार ने विजेता छात्रों को सम्मानित किया।
